रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपरेशन सिंदूर की कूटनीतिक लाइन बताई, जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे (जैसे को तैसा)। विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी लगातार इसी को दोहरा रहे हैं। भारत का इरादा कभी भी युद्ध को बढ़ावा देने का नहीं रहा है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि यह नॉन एस्केलेशन का मंत्र ही काम आएगा। इसे चलाते रहिए, लेकिन सवाल है कि दोनों तरफ से ड्रोन, मिसाइल कब तक चलेगी और आपरेशन सिंदूर का चौधरी (रेफरी) कौन बनेगा?
पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि इस बार भारत किसी दबाव नहीं आने वाला है। हम 1965, 1971 की गलतियां नहीं दोहराने वाले हैं। इस बार ऐसा लग रहा है कि भारत बेहद सतर्क है। भारत को अपना उद्देश्य और लक्ष्य पता है। भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध आत्मरक्षा के मंत्र को आगे कर रखा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए साफ कह रहे हैं कि भारत ने केवल आतंकी कैंप पर हमला किया है। भारत युद्ध को भड़काना नहीं चाहता, लेकिन पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का जवाब देने का उसे अधिकार है।
नॉन स्केलेशन ऑफ वॉर (युद्ध न भडकाना) भारत का मंत्र, दिलाएगा सफलता
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को 22 अप्रैल को बायसरन घाटी, पहलगाम में हुए हमले के बहाने षडयंत्रपूर्ण तरीके से तनाव बढ़ाने का दोषी बताया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यह पाकिस्तान का स्केलेशन का पहला प्रयास था। दूसरा प्रयास उसने भारत की आतंकी शिविरों पर कार्रवाई के बाद भारतीय सैन्य ठिकाने पर नाकाम हमला करके किया। विक्रम मिस्री और एनएसए डोभाल का साफ कहना है कि भारत तनाव बढ़ाने और युद्ध के पक्ष में नहीं है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में न तो नागरिक ठिकानों को और न ही सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। पूर्व विदेश सचिव शशंक कहते हैं कि यह मंत्र अच्छा है। यही सफलता दिलाएगा। हमे इस पूरे आपरेशन को नॉन एस्केलेशन मोड (लड़ाई न भड़कने) में ही रखना है। उसकी प्रतिक्रिया का ही ठोस जवाब देना है।
ऑपरेशन सिंदूर के 'चौधरी (रेफरी)' से आशय क्या है?
भारत ने पाकिस्तान के साथ गणराज्य बनने के बाद 1965, 1971, 1999 में कारगिल का युद्ध लड़ा है। 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 में आपरेशन बालाकोट को अंजाम दिया। 1965 में रूस ने ताशकंद में भारत-पाक के बीच शांति समझौता कराया था। 1971 में अंतरराष्ट्रीय दबाव था और दोनों देशों ने शिमला में शांति समझौता किया था। 1999 में अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर दबाव बनाया। पाकिस्तान को पीछे हटने के लिए कहा और भारत ने पाकिस्तान की सेना के भेष में आए घुसपैठियों से अपनी जमीन खाली कराई। तब भारत और पाकिस्तान नए-नए घोषित परमाणु शक्ति संपन्न देश बने थे। 2019 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे। आपरेशन बालाकोट के दौरान हमारा फाइटर पायलट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चला गया था और ट्रंप के दखल से विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को वापस लाने में मदद मिली थी। कहने का मतलब कि कभी रूस तो कभी अमेरिका ने चौधरी की भूमिका निभाई थी।
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कोई देश नहीं चाहता बीच में पड़ना
भारतीय सैन्य बलों ने 6-7 मई की रात में आपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकाने पर 25 मिनट में 24 मिसाइल दागकर बायसरन घाटी, पहलगाम के आतंकी हमले का बदला लिया। इसके ठीक पहले तक अमेरिका के विदेश सचिव और एनएसए मार्को रुबियो दोनों देशों के लगातार संपर्क में रहे। अमेरिकी नेतृत्व ने पाकिस्तान से संरक्षित आतंकवाद के विरुद्ध भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को समर्थन दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसकी पुष्टि की। सात मई को आपरेशन सिंदूर के बाद मार्को रूबियो ने एनएसए अजीत डोभाल और पाकिस्तान के एनएसए,प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से बात की। मार्को रुबियो ने दोनों देशों संयम बरतने, लड़ाई को ऐगे न बढ़ने देने और संचार लाइन को जारी रखने का सुझाव दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान आया। अमेरिका अभी यही संकेत दे रहा है कि वह दोनों देशों के बीच में अभी कोई भूमिका नहीं निभाना चाहता।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ईरान के विदेश मंत्री निर्धारित कार्यक्रम के तहत दिल्ली में थे। विदेश मंत्री एस जयशंकर से उनकी भेंट और वार्ता हुई। यूएई के विदेश मंत्री बिना किसी पूर्व निधार्रित कार्यक्रम के दिल्ली आए। उन्होंने भी अपने समकक्ष एस जयशंकर से बात की। दोनों देशों के बीच में तनाव कम करने, संयम बरतने का सुझाव दिया। हालांकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की विदेश नीति, कूटनीति, आपरेशन सिंदूर की रणनीति को आगे बढ़ाते हुए साफ कहा कि भारत का उद्देश्य युद्ध और तनाव को बढ़ाना नहीं है, लेकिन भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान से संरक्षित, पोषित आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। विदेश सचिव मिस्री ने भी सवाल पूछा कि आखिर आतंकी के जनाजे में फातिहा के दौरान पाकिस्तान की सेना के अधिकारियों की मौजूदगी क्यों थी? भारत का साफ कहना है कि वह लड़ाई और तनाव बढ़ाने का पक्षधर नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की किसी भी उकसावे की कार्रवाई का मुंबतोड़ जवाब देगा। दिलचस्प है कि भारत के इस रूख और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिक्रिया देने के बीच में अभी तक किसी देश या इस्लामिक समूह के संगठन देश ने किसी तरह का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाया है।
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क्या है सीमा पर हालात?
सेना की प्रवक्ता कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि 8 मई को भी पाकिस्तान से सीमावर्ती राज्य में भारी गोलीबारी की जा रही है। भारत इसका मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। पाकिस्तान की तरफ से 500 ड्रोन, मिसाइल, फाइटरजेट से भारतीय सैन्य ठिकानों पर नाकाम हमले की कोशिश की गई। उसके 50 ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट को मार गिराने में सफलता मिली है। भारतीय प्रतिरक्षा प्रणाली और सैन्य बलों की सक्रियता ने पाकिस्तान के हमलों को बेअसर कर दिया और भारत को बड़े नुकसान से बचा लिया। विक्रम मिस्री ने कहा कि आज सुबह भी सीमा पार से जो गतिविधियां हुई, उसका भारत ने ठोस तरीके से बहुत जिम्मेदाराना पूर्ण जवाब दे दिया है। पाकिस्तान से भी इसी तरह के आरोप हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने तीन भारतीय राफेल जेट मार गिराने का दावा किया। पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता ने भारत की तरफ से ड्रोन आदि से हमले का आरोप लगाया और भारत 80 ड्रोन मार गिराने का दावा किया।
बलूचिस्तान अलग होगा और पानी तो देंगे लेकिन द्विपक्षीय समझौते के बाद
पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि पाकिस्तान का षडयंत्र नाकाम हो रहा है। भारत की सही रणनीति उसे घुटने के बल लाएगी। पूर्व विदेश सचिव कहते हैं कि पाकिस्तान का यही हाल रहा तो बलूचिस्तान उससे अलग हो सकता है। भारत अब पाकिस्तान से आतंकवाद को सह न देने, अपनी जमीन से भारत विरोधी गतिविधियां और आतंक की जड़ो को नष्ट करने की प्रतिबद्धता ले सकता है। रहा सवाल सिन्धू नदी के जल का है तो भारत को पानी देने में एतराज नहीं होना चाहिए, लेकिन यह 1960 के दशक की ट्रीटी के जरिए नहीं। बल्कि इसके लिए दोनों देश द्विपक्षीय समझौता करें और इसकी शर्तें शामिल हों।
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