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CJI: सीजेआई खन्ना ने दिया याचिकाओं को स्पष्ट बनाने पर जोर, कहा- 'कम ही अधिक है' के सिद्धांत को अपनाया जाए

Fri, 09 May 2025 07:30 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) की ओर से आयोजित विदाई समारोह में सीजेआई ने कहा कि याचिकाएं जितनी छोटी और स्पष्ट होंगी, यह वकीलों और न्यायाधीशों के लिए अधिक लाभदायक होगा। 
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संजीव खन्ना, सीजेआई - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने शुक्रवार को याचिकाओं को स्पष्ट बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यवाही में छोटी याचिकाओं की जरूरत है। इसलिए जरूरी है कि कम ही अधिक है के सिद्धांत को अपनाया जाए। क्योंकि याचिकाओं में स्पष्टता वकीलों और न्यायाधीशों दोनों के लिए फायदेमंद है। ड्राफ्टिंग की कला में महारत हासिल करने के लिए बहुत कठिन प्रयास करने की आवश्यकता है। 
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सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) की ओर से आयोजित विदाई समारोह में सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि एक चीज जो मुझे अभी भी महसूस होती है कि हम वास्तव में नहीं सीख पाए हैं, वह है ड्राफ्टिंग करने की कला। मुझे लगता है कि इसके लिए बहुत प्रयास की आवश्यकता है। हमें कम ही अधिक है की कहावत को अपनाना चाहिए।

सीजेआई ने कहा कि आप जितना कम बोलेंगे, याचिकाएं जितनी छोटी होंगी, जितनी स्पष्ट होंगी, यह आपके लिए और न्यायाधीशों के लिए अधिक लाभदायक होगा, क्योंकि न्यायाधीश होने के नाते हम अच्छी तरह जानते हैं कि किस मुद्दे पर बहस की जा रही है। याचिकाओं के स्पष्ट होने से फाइलों को आसानी से पढ़ने में मदद मिलती है।
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उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में मैं आपको बता सकता हूं कि यदि फाइल पढ़ने वाले न्यायाधीश को लगता है कि इसमें कोई ऐसा दृष्टिकोण है जिस पर विचार करने की आवश्यकता है, तो आपका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अधिवक्ता अपने वरिष्ठों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं अदालतों में मामलों पर बहस करें।

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उन्होंने कहा कि आपकी वादियों तक सीधी पहुंच है। वादी आपसे बात करते हैं। आप संक्षिप्त विवरण तैयार करते हैं, अध्ययन करते हैं और फिर किसी वरिष्ठ को संक्षिप्त विवरण देते हैं। आप स्वयं न्यायालय में आकर बहस क्यों नहीं करते? वकीलों के लिए डोमेन और विषय वस्तु कौशल बहुत महत्वपूर्ण हैं।

किसी मामले के तथ्यों की पूरी जानकारी रखने के महत्व को लेकर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामलों का निर्णय तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हर मामले का निर्णय बड़े संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। आप उन संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय ले सकते हैं, लेकिन पहले आपके पास तथ्य होने चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता एक ऐसा क्षेत्र है जो मुख्यधारा बनने जा रहा है, शायद सर्वोच्च न्यायालय में नहीं, लेकिन अधिकांश न्यायालयों में। इसलिए हमने ऑनलाइन मध्यस्थता प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किया, जिसके बारे में मुझे बताया गया है कि यह बहुत लोकप्रिय हो गया है। मध्यस्थता से अदालतों में लगने वाला समय कम हो जाएगा।

सीजेआई ने मेंटरशिप के महत्व पर भी बात की और कहा कि जिनके पास 10 या 20 साल का अनुभव है, उन्हें युवा वकीलों के लिए दरवाजे खोलने चाहिए। मैं ऐसे किसी भी व्यक्ति की मदद करना चाहूंगा, जिसके पास कोई कानूनी मुद्दे या प्रश्न हों। मैं अपना पद छोड़ने की तैयारी कर रहा हूं और ऐसा मैं इस संस्था भारत के सर्वोच्च न्यायालय में गहरी आस्था के साथ कर रहा हूं।
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नए सीजेआई ने भी किया संबोधित
भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति बीआर गवई ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सीजेआई खन्ना अपने कार्यकाल के दौरान पारदर्शिता और समावेशिता लेकर आए। मुख्य न्यायाधीश खन्ना हमेशा बहुत खुले विचारों वाले रहे। 

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