राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा के दौरान कहा कि जब तक पहलगाम हमले के आतंकियों को पकड़ा नहीं जाता, तब तक इस सैन्य अभियान को कामयाब नहीं माना जा सकता।
दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को पाकिस्तान आधारित आतंकियों ने 26 पर्यटकों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी थी। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
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सुले ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर तब तक सफल नहीं माना जा सकता, जब तक आतंकियों को नहीं पकड़ा जाता। जब तक आप आतंकवादियों को नहीं पकड़ते, तब तक इसका जश्न नहीं मनाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत से शांति बनाए रखने की अपील की है, तो सरकार को इस पर भी फोकस करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि हमारी सेना ने जो जवाबी कार्रवाई की, उसका क्या नतीजा निकला। इसकी अब तक कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई है।
उन्होंने हमले में मारे गए लोगों के परिजनों के दुख को याद करते हुए बताया कि उनके क्षेत्र का एक व्यक्ति बार-बार उनसे पूछता है- मेरे पापा को इंसाफ कब मिलेगा? सुले ने कहा कि कभी स्वर्ग माने जाने वाला कश्मीर अब कई लोगों के लिए खौफनाक सपना बन चुका है। उन्होंने कहा कि केवल मुआवजा देना काफी नहीं है, जब तक रोजगार और जवाबदेही नहीं दी जाती।
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कांग्रेस सांसद प्रणिति शिंदे ने भी सदन को संबोधित करते हुए कहा कि वह आक्रोश, दुख और अपमान की भावना के साथ सैनिकों की ओर से यह बात रख रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के प्रधानमंत्री की बजाय एक विदेशी नेता से सैनिकों को संघर्ष विराम के निर्देश मिले। शिंदे ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने चुनाव से पहले जनता का ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को एक तमाशा बना दिया है और उन्होंने इसकी तुलना रोम के कोलोसियम से की।
उन्होंने कहा कि पहलगाम के आतंकियों को आज तक पकड़ा नहीं गया है। उस वक्त प्रधानमंत्री बिहार में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, जबकि देश में लोगों की चिताएं जल रही थीं।