बता दें कि चौटाला, दो दिसंबर 1989 को पहली बार सीएम बने थे। उनका पहला कार्यकाल 171 दिन का रहा। 12 जुलाई 1990 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला। इस बार उनका कार्यकाल महज पांच दिन का रहा। 22 मार्च 1991 को वे तीसरी बार सीएम बने। इस बार उनका कार्यकाल 15 दिन का रहा था। ओमप्रकाश चौटाला, 24 जुलाई 1999 को चौथी बार मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी। इससे पहले हरियाणा में हरियाणा विकास पार्टी और भाजपा गठबंधन की सरकार थी। भाजपा ने हविपा से गठबंधन तोड़ दिया। इसके बाद मार्च 2000 में विधानसभा चुनाव हुए। उसके बाद चौटाला ने पांचवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे पांच मार्च 2005 तक सीएम रहे। बतौर मुख्यमंत्री, उनका यही कार्यकाल 'पांच वर्ष 224 दिन' सबसे लंबा रहा था। उन्हें शिकायत मिली थी कि अफसर ठीक तरह से लोगों की बात नहीं सुनते। लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
प्रदेश के पूर्व गृह एवं वित्त मंत्री और छह बार के विधायक प्रो. संपत्त सिंह ने चौटाला के जीवन से जुड़ी कई बातों का खुलासा किया है। चौटाला को जब यह शिकायत मिली कि गांवों में लोगों की सुनवाई नहीं हो रही। उस वक्त उन्होंने पूरा सीन ही बदल दिया। भले ही उनके इस कदम से अफसरों को कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन जनता खुश हो गई। चौटाला अपने दल बल के साथ गांवों में जाने लगे। उन्होंने अपनी इस योजना का नाम 'सरकार आपके द्वार' कार्यक्रम रखा। जब वे गांवों में जाते तो कई दिन पहले से अफसर वहां डेरा डाल लेते थे। कई अफसरों को मौके पर ही फटकार लगती। लोगों के बीच ही चौटाला, अफसरों को तलब कर पूछते थे कि बताओ ये काम कितने दिन में पूरा हो जाएगा। इतना ही नहीं, वे खुद उतने ही दिन में संबंधित अधिकारी से फालॉअप भी लेते थे।
इसका फायदा यह हुआ कि अफसरों में डर पैदा हो गया और जनता के काम फटाफट होने लगे। बाद में उनका कार्यक्रम अन्य नामों और योजनाओं के जरिए फॉलो किया जाने लगा। 2005 में मुख्यमंत्री बने भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सरकार और लोगों के बीच की दूरी को बढ़ने नहीं दिया। चौटाला के मॉडल के अनुसार ही, हुड्डा भी लोगों के बीच जाने लगे। इसके बाद भाजपा सरकार भी 'समाधान दिवस' के तौर उस कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। ओमप्रकाश चौटाला का नाम कई विवादों में रहा है। विभिन्न जिलों में बनाए गए देवीलाल पार्क, इसे विपक्षी दलों ने गलत बताया था। महम कांड में भी उन पर आरोप लगे।
ओम प्रकाश चौटाला ने तिहाड़ जेल में रहते हुए 85 साल से अधिक आयु में 12वीं की परीक्षा पास की। इससे पहले उन्होंने दसवीं की परीक्षा पास की थी। वर्ष 2002 में उनकी सरकार के दौरान किसानों पर गोलीबारी हुई। उसमें करीब डेढ़ दर्जन किसान मारे गए। भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने चौटाला के कार्यकाल में हुए जूनियर बेसिक टीचर (जेबीटी) घोटाले की जांच कराई। उस मामले की सीबीआई जांच हुई। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने ओम प्रकाश चौटाला को दोषी ठहराया। उन्हें 10 साल कारावास की सजा मिली। ओम प्रकाश चौटाला के पास हजार करोड़ की संपत्ति होने का दावा किया गया। सीबीआई ने चौटाला परिवार के खिलाफ 1467 करोड़ रुपये की संपत्ति के मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। उनके परिवार के नाम से अस्सी जगहों पर प्रॉपर्टी बताई।
सत्तर के दशक में जब उनके पिता चौधरी देवीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, तब ओमप्रकाश चौटाला, बैंकॉक (थाईलैंड) में साउथ-ईस्ट एशिया के सम्मेलन में गए थे। जब वे भारत लौटे तो दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उनके बैग से चार दर्जन घड़ियां और दो दर्जन महंगे पेन बरामद किए थे। तब मीडिया में यह चर्चा हुई थी कि देवीलाल का बेटा महंगी घड़ियों की स्मगलिंग में पकड़ा गया है।