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भारत की दो टूक: बातचीत के लिए उचित वातावरण बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की, आतंकवाद पर कार्रवाई के बाद ही संबंध सुधरेंगे  

Thu, 07 Apr 2022 06:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुरलीधरन ने कहा कि सरकार का हमेशा से मानना रहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी की तरह संबंध चाहता है। भारत आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त माहौल में द्विपक्षीय और शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को हल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है।
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वी मुरलीधरन - फोटो : ani
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विस्तार
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भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से संबंधों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत के लिए उचित वातावरण बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है। सरकार ने गुरुवार को संसद में कहा कि वह पाकिस्तान के साथ अच्छे पड़ोसी की तरह संबंध रखने की इच्छा रखता है, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को आतंक पर ठोस और सच्ची कार्रवाई करनी होगी।

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दरअसल, विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन से राज्यसभा में मीडिया रिपोर्टों पर पक्ष रखने की मांग की गई थी। इन रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सलाहकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को फिर से शुरू किए जाने पर जोर दे रहे हैं।

मुरलीधरन ने कहा कि सरकार का हमेशा से मानना रहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी की तरह संबंध चाहता है। भारत आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त माहौल में द्विपक्षीय और शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को हल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है।
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विदेशी जेलों में 8000 से ज्यादा भारतीय कैद 
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान सहित अन्य विदेशी जेलों में 8000 से ज्यादा भारतीय कैद हैं। इनमें ज्यादातर खाड़ी देशों की जेलों में बंद हैं। विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में कहा कि विदेशी जेलों में कैद भारतीयों को छुड़ाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार विदेशी जेलों में विचाराधीन कैदियों सहित 8278 लोग बंद हैं।

मतदान की अनिवार्यता पर रिजीजू ने कही यह बात
इस बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि मतदान अनिवार्य करने और चुनावों में मताधिकार का उपयोग करने वालों के नाम सार्वजनिक करने के संबंध में उसके पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री किरण रिजीजू ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। शिव सेना के संजय राउत ने यह जानना चाहा था कि क्या सरकार देश में मतदान को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है।

इसके जवाब में रिजीजू ने कहा कि मतदान को अनिवार्य बनाने का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। मंत्री से यह सवाल भी किया गया था कि क्या सरकार विभिन्न चुनावों में अपने मताधिकार का उपयोग करने वाले मतदाताओं के नाम देश के विभिन्न निर्वाचन आयोगों (ईसीआई) की वेबसाइट पर प्रकाशित करने पर विचार कर रही है। 

इसके जवाब में रिजीजू ने कहा कि भारत के निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर विभिन्न निर्वाचनों में अपने मताधिकार का उपयोग करने वाले मतदाताओं के नाम प्रकाशित करने का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है।

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