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Research: बुलिंग पीड़ित बच्चों में मनोविकृति की शुरुआत, पर लक्षण नहीं

Wed, 07 Feb 2024 07:39 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जापान के शोधकर्ताओं ने 500 से ज्यादा किशोरों पर अध्ययन कर बताया है कि पीड़ित किशोर एक ऐसी मानसिक स्थिति का सामना करते हैं जो वास्तविकता के संपर्क से बाहर होता है। शोधकर्ताओं ने पीड़ित किशोरों की भावनाओं को नियंत्रित करने में अहम पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स (एसीसी) में न्यूरोट्रांसमीटर ग्लूटामेट का निम्न स्तर पाया।
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विस्तार
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बुलिंग पीड़ित किशोरों में मनोविकृति की शुरुआत हो रही है जिसके बारे में चिकित्सा जांच से भी पता नहीं लगाया जा सकता। इसके पीछे मुख्य कारण विकृति के वह लक्षण हैं जो काफी प्रारंभिक हैं और किसी भी चिकित्सक के लिए इन्हें पहचान कर उपचार या काउंसलिंग देना संभव भी नहीं है। एक चिकित्सा अध्ययन में यह सच सामने आया है।

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जापान के शोधकर्ताओं ने 500 से ज्यादा किशोरों पर अध्ययन कर बताया है कि पीड़ित किशोर एक ऐसी मानसिक स्थिति का सामना करते हैं जो वास्तविकता के संपर्क से बाहर होता है। शोधकर्ताओं ने पीड़ित किशोरों की भावनाओं को नियंत्रित करने में अहम पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स (एसीसी) में न्यूरोट्रांसमीटर ग्लूटामेट का निम्न स्तर पाया। आमतौर पर ग्लूटामेट सबसे प्रचुर न्यूरो ट्रांसमीटर होता है जो मूड को नियंत्रित करने सहित व्यापक कार्यों में शामिल रहता है।

तेजी से बढ़ रहीं घटनाएं
दरअसल बदमाशी या बुलिंग का मतलब किसी कमजोर व्यक्ति पर धौंस जमाना है। यह एक आम तरह की आक्रामकता है, जो 12 से 18 साल के बीच के 22% बच्चों को प्रभावित करती है। किसी को ताना देना या चिढ़ाना, लोगों को किसी के बारे में बुरा महसूस कराने के लिए गपशप करना, थूकना, धकेलना, चीजें तोड़ना यह बुलिंग के तरीके हैं जो पहले मस्ती-मजाक, धक्का-मुक्की और टांग खिंचाई तक ही सीमित थी, लेकिन अब यह भावनात्मक, यौन उत्पीड़न और यहां तक कि साइबर बुलिंग बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
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सिजोफ्रेनिया के लक्षण भी शामिल
शोधकर्ताओं ने इन किशोरों में एक प्रश्नावली का भी उपयोग किया और उनके अनुभवों का आकलन करने के लिए औपचारिक मनोरोग माप विधियों पर काम किया। इसमें पाया कि जो किशोर बुलिंग से पीड़ित हैं उनमें मनोविकृति के प्री क्लिनिकल चरणों के लक्षण हैं जिनकी पहचान सामान्य तौर पर चिकित्सा जांच में हो पाना संभव नहीं है। इनमें से कुछ विकारों में सिजोफ्रेनिया और द्विध्रुवी विकार की उन्मत्त अवस्था शामिल है।

ऐसे बचाए जा सकते हैं किशोर
इंटरनेशनल रिसर्च सेंटर फॉर न्यूरो इंटेलिजेंस और मॉलिक्यूलर साइकिएट्री जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर नाओहिरो ओकाडा ने कहा है कि मानसिक विकारों के शुरुआती चरणों को समझने और पीड़ितों की पहचान के लिए यह अध्ययन काफी महत्वपूर्ण है। इसमें हमें यह पता चला है कि पीड़ित किशोरों में मानसिक विकारों के होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि पांचवीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए स्कूलों में बुलिंग विरोधी कार्यक्रम संचालित होने चाहिए। ये कार्यक्रम सभी छात्रों के लिए एक सुरक्षित और सहायक वातावरण बनाने में मदद कर सकते हैं।

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