जननी सुरक्षा योजना वसूली का हथकंडा बनकर सामने आई है। प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती जैसे-तैसे सीएचसी पहुंची तो भर्ती करने के लिए 500 रुपये मांगे गए। पति की जेब में सिर्फ तीन सौ रुपये थे। वह गिड़गिड़ाया कि हालत ठीक नहीं। कभी भी बच्चा हो सकता है लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई और हीमोग्लोबिन कम बताकर जिला अस्पताल के लिए रेफर करने की स्लिप बना थमा दी गई।
गरीब परिवार के पास जिला अस्पताल तक जाने के पैसे नहीं थे तो गर्भवती को लेकर घर लौटने लगे। आठ किलोमीटर टेंपो का सफर गर्भवती ने छटपटाते हुए किया और आखिर में सड़क किनारे ही बच्ची को जन्म दिया। राहगीरों ने लखनऊ फोन कर एंबुलेंस बुलाई तो यह सोचकर कि हो सकता है कि सीएचसी वाले अब मान जाएं।
पति जच्चा और बच्ची दोनों को लेकर फिर सीएचसी पहुंचा लेकिन यहां तो संवेदनहीन स्टाफ ने देखने से ही इंकार कर दिया। कहा कि प्रभारी चिकित्सक के आदेश के बिना भर्ती नहीं करेंगे और प्रभारी मीटिंग में गए हैं। डेढ़ घंटे इंतजार के बाद फिर परिवार जच्चा और बच्चा को लेकर घर लौट गया। शुक्र है कि अब तक दोनों स्वस्थ हैं लेकिन इन्हें कुछ भी हो सकता था।
आशा बहू वीरवती परेवा मोहम्मद अली गांव के रामपाल की पत्नी किरन और रूपचंद की पत्नी मीना को मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे 108 एंबुलेंस से सीएचसी भोजीपुरा लेकर आई। बताया जा रहा है कि वहां मौजूद डॉक्टर शांता दत्ता और स्टाफ नर्स सोनी ने दोनों को देखे बिना ही बरेली जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
दोनों का हीमोग्लोबिन कम होने का हवाला दिया गया। आशा बहू मीना को लेकर एंबुलेंस से जिला अस्पताल चली गई। रामपाल अपनी चाची सुनीता और पत्नी किरन को लेकर टेंपो से आठ किमी दूर नैनीताल रोड पर आटामांडा तिराहे पर आ गया। साढ़े 12 बजे अचानक उसे दर्द उठा तो रामपाल ने उसे सड़क किनारे लिटा दिया। आधे घंटे बाद ही उसने बेटी को जन्म दे दिया।
प्रसव के बाद भर्ती करने की गुहार लगाई तो भी नहीं पसीजे
सड़क पर किलकारी गूंजने पर राहगीरों की भीड़ लग गई। टेंपो चलाने वाले राजेश शर्मा ने 108 नंबर पर फोन कर लखनऊ शिकायत की तो डेढ़ बजे 108 एंबुलेंस पहुंच गई। वहां से दोनों को सीएचसी ले जाया गया। तब तक दो बज चुके थे। डॉक्टर जा चुके थे। सिर्फ स्टाफ नर्स प्रिया सक्सेना मौजूद थी।
आरोप है कि उसने जच्चा-बच्चा का इलाज कराने से मना कर दिया। नर्स का कहना था कि बच्चा अस्पताल से बाहर हुआ है इसके लिए प्रभारी चिकित्सा की अनुमति जरूरी है और वह इस समय सीएमओ की बैठक में हैं, फोन बंद है। महिला का पति कोई दवा देने की गुहार लगाता रहा मगर उसकी नहीं सुनी गई। करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल के एक कोने में पड़े रहने के बाद रामपाल पत्नी और बच्चे को टेंपो से घर ले आया।
हां हमसे 500 रुपये मांगे गए
प्रसूता किरन की चाची सुनीता ने कहा कि सुबह साढे़ दस बजे जब अस्पताल पहुंची तो करीब 11 बजे एक लेडी डॉक्टर आई और पांच सौ रुपये मांगे। हमने रुपये नहीं होने की बात कही तो बरेली जाने को कह दिया गया। बरेली जाकर ज्यादा रुपये न मांग लें, इसलिए वहां नहीं गए।
गर्भवती महिला आई थी लेकिन उसका हीमोग्लोबिन 8 ग्राम पाया गया। प्रसव हो जाता, लेकिन बाद में खून चढ़ाने और अन्य दिक्कत न हो इसके लिए तीमारदारों को बताकर रेफर किया गया। 102 और 108 बुलाने की ड्यूटी हमारी नहीं है। वह लखनऊ से देखी जाती है इसलिए तीमारदार सीधे फोन कर सकते हैं। प्रसव होने के बाद वे फिर अस्पताल लेकर आए थे, महिला को भर्ती भी किया गया लेकिन तीमारदार उसे ले गए। लिखित शिकायत मिली तो दोषियों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। कल स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। सीएचसी पर लेडी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। डिलीवरी का काम स्टाफ नर्स और एचबी शांता दत्ता देखती हैं। इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. अमित थे। चूंकि प्रसव अस्पताल के बाहर हुआ है इसलिए प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी नहीं मिलेगा।
-डॉ. सौरभ सिंह, प्रभारी सीएचसी भोजीपुरा
किरन ने जनवरी में जांच कराई तो हीमोग्लोबिन कम था। उसका मुंह पीला पड़ गया था। इसलिए उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। लेडी डाक्टर हैं नहीं, स्टाफ नर्स इतना बड़ा रिस्क कैसे उठा सकती हैं।
-शांता दत्ता, सुपरवाइजर सीएचसी भोजीपुरा
सुरक्षित प्रसव सरकार की प्राथमिकता में है। यह बहुत गंभीर मामला है। पहले जांच कराई जाएगी और दोषी पर कार्रवाई होगी।
-डॉ. सुबोध शर्मा, संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण