हाल ही में प्रकाशित लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल तकरीबन 16 लाख भारतीय घटिया स्वास्थ्य सेवाओं के चलते मौत के मुंह में समा जाते हैं। वहीं हमारे देश में सबसे ज्यादा भरोसा प्राइवेट अस्पतालों पर किया जाता है। केंद्र सरकार की 23 सितंबर से शुरू होने वाली आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना में तकरीबन 8 हजार प्राइवेट अस्पताल शामिल होने जा रहे हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि देश में मात्र 1 फीसदी प्राइवेट अस्पताल ही गुणवत्ता के लिए मान्यता प्राप्त हैं।
देश में एक लाख अस्पताल
सरकार की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि लोगों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएं। जबकि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 19,817 सरकारी अस्पताल हैं, वहीं प्राइवेट अस्पतालों की संख्या तकरीबन 80,671 है। इनमें से मात्र 536 अस्पताल ही भारतीय गुणवत्ता परिषद के बनाए हेल्थकेयर प्रदाताओं के लिए बने राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं। ये हाल तब है जब देश की 70 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाएं निजी हाथों में हैं। वहीं आयुष्मान भारत में कम से कम 10 बेड के सभी प्राइवेट अस्पताल भी इम्पैनलमेंट किए जाएंगे। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 50 करोड़ भारतीयों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी। इसके अलावा बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) में भी कैशलेस स्कीम के लिए केवल मान्यता प्राप्त अस्पतालों के ही इम्पैनलमेंट का प्रावधान है।
दिल्ली के 50 अस्पताल मान्यता प्राप्त
बोर्ड की सूची के मुताबिक मान्यता प्राप्त 536 में ज्यादातर बड़े समूह वाले अस्पताल हैं। जबकि गुजरात का एकमात्र सरकारी अस्पताल ही इससे मान्यता प्राप्त है। हैरानी की बात राजधानी के तकरीबन 50 अस्पताल बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन सफदरजंग, आरएमएल, एलएनजेपी अस्पताल समेत बड़े सरकारी अस्पतालों में से कोई भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है।
बेस्ट क्वॉलिटी के लिए 683 मानक
भारतीय गुणवत्ता परिषद यानी क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसके लिए नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स बनाया हुआ है। यह बोर्ड देश के सभी अस्पतालों को अपने 683 मानकों का पालन करने वाले सभी अस्पतालों को मान्यता देता है। वहीं एंट्री लेवल के लिए 150 मानक हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है।
सख्त हैं मानक
नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्ष नाडकरनी का कहना है कि देश में अभी तक तकरीबन 500 अस्पतालों को ही बोर्ड से मान्यता मिली हुई है। उन्होंने बताया कि वे केवल उन्ही अस्पतालों को मान्यता देते हैं, जो बेस्ट क्लास सर्विस और गुणवत्ता का ख्याल रखते हैं। वे बताते हैं कि उनके बोर्ड के पैरामीटर्स बेहद सख्त हैं और हर किसी के लिए उन मानकों का पालन करना आसान नहीं होता। नाडकरनी के मुताबिक जरूरी नहीं है कि ये सभी अस्पताल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल हों। उनके मुताबिक यह उन प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर करता है कि वे इस योजना में शामिल हों या नहीं।