यात्री टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग पर अब सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। बजट में किए गए इस प्रावधान से रेलवे को कुल 551.49 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। यही नहीं आईआरसीटीसी को इस फैसले से करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि इसके आय का सबसे बड़ा स्त्रोत यही है। कुल मुनाफे का 43 प्रतिशत हिस्सा इस स्त्रोत से आता है। ऐसे में यात्रियों की सुविधाओं में दिक्कत आ सकती है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार आईआरसीटीसी से जब कैटरिंग का काम लिया गया तो 139 व ऑनलाइन टिकट पर पूरा फोकस किया गया। इस सेक्टर से आईआरसीटीसी को कुल मुनाफे का 43 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। इसी तरह 26 प्रतिशत टूरिज्म से और 31 प्रतिशत आय आईआरसीटीसी को रेल नीर व कैटरिंग से होती है।
इस फैसले से टिकट लेने वालों का बोझ भी बढ़ेगा और आईआरसीटीसी को अपने आईटी विभाग को और अधिक मजबूत करने की जरूरत होगी।
लिहाजा अब अगर रेलवे मंत्रालय आईआरसीटीसी को सब्सिडी नहीं देता है तो बेहतर सुविधाओं में कमी आ सकती है। आधिकारिक सूत्रों का यह भी कहना है कि तीन सौ करोड़ का नुकसान होने पर बेहतर सुविधा में कमी आएगी।
वित्त मंत्री के इस फैसले से रेलवे को भी ढाई-तीन सौ करोड़ रुपये का चूना लगेगा। क्योंकि आईआरसीटीसी 50 प्रतिशत कमाई का हिस्सा रेलवे को देती है और 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी सेक्टर में लगाती है।