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वन रैंक वन पेंशन: सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दावा, हमने हद से बाहर जाकर काम किया

Sat, 28 Jul 2018 06:16 AM IST
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह वन रैंक वन पेंशन(ओआरओपी) के फार्मूले में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है। सरकार ने कहा है कि इस मामले में जितना किया जा सकता था उससे अधिक किया गया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा, हम ओआरओपी के फार्मूले में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। हमने इस मसले पर हद से बाहर जाकर काम किया है।

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’ मनिंदर सिंह ने यह भी कहा कि इस फार्मूले में बदलाव करने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। साथ ही सरकार ने  इस फार्मूले पर हर पांच वर्ष बाद पुनर्विचार करने के नियम में भी बदलाव करने से इनकार किया है। मालूम हो कि वर्तमान नियम केतहत हर पांच वर्ष फार्मूले पर पुनर्विचार किया जाना है। पीठ ने सरकार को हलफनामे के जरिए अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए चार हफ्ते बाद सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

शीर्ष अदालत ने पूर्व सैनिकों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में ओआरओपी के फार्मूले को गलत बताते हुए बदलाव की गुहार की गई है। सुनवाई के दौरान मनिंदर सिंह ने यह भी कहा कि इस याचिका पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इसमें नीतिगत फैसले को चुनौती दी गई है।
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वहीं याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने कहा कि वह मैंटेबिलिटी और मेरिट केआधार पर केस लडने को तैयार हैं। याचिका में कहा गया है कि कोशियारी कमेटी की सिफारिशों केअनुकूल सरकार को ओआरओपी का फार्मूला बनाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। साथ ही याचिका में फार्मूले पर हर साल पुनर्विचार करने की भी गुहार की गई है। 

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