लोकसभा में एक देश एक चुनाव विधेयक पेश किए जाने के पर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। किसान मोर्चा ने इसे राज्य सरकारों के संघीय अधिकारों को समाप्त कर एक बाजार बनाने का कॉर्पोरेट एजेंडा करार दिया। बता दें कि 2020-21 में दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसकेएम ने किसानों और श्रमिकों से एक राष्ट्र, एक चुनाव विधेयक का विरोध करने की अपील की।
एसकेएम का आरोप
एसकेएम ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि वस्तु एवं सेवा कर (GST), डिजिटल कृषि मिशन, राष्ट्रीय सहयोग नीति और कृषि बाजार पर नीति ढांचा सभी कॉर्पोरेट शक्तियों के तहत उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को केंद्रीकृत करने की बड़ी योजना का हिस्सा हैं। एसकेएम ने कहा यह विधेयक राज्य सरकारों की स्वायत्तता और संघीय अधिकारों को खत्म करने का प्रयास है और यह कॉर्पोरेट शोषण को बढ़ावा देने के लिए 'एक राष्ट्र, एक बाजार' बनाने का हिस्सा है।
जीएसटी का लागू होना भी कॉर्पोरेट एजेंडे का हिस्सा- किसान मोर्चा
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2017 में जीएसटी का लागू होना भी इस कॉर्पोरेट एजेंडे का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य राज्य सरकारों के कराधान अधिकारों और स्वायत्तता को कमजोर करना था। एसकेएम ने कहा कि पिछले केंद्रीय बजट में डिजिटल कृषि मिशन और राष्ट्रीय सहयोग नीति की शुरुआत और कृषि विपणन पर नीति रूपरेखा की घोषणा, इन सभी कदमों का उद्देश्य किसानों के खिलाफ तीन कृषि कानूनों को फिर से लागू करना है।
किसान मोर्चा की अपील
इसके साथ ही एसकेएम ने किसानों और श्रमिकों से इस विधेयक का विरोध करने की अपील की और विपक्षी दलों से लोगों को एकजुट करने की अपील की, ताकि वे एमएसपी, न्यूनतम मजदूरी, बेरोजगारी, मूल्य वृद्धि और ऋणग्रस्तता जैसे मुद्दों पर एक साथ आ सकें।