पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल)
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भारत में एक साथ चुनाव यानी 'वन नेशन वन इलेक्शन' की संभावनाओं को पहचानने और सरकार को सुझाव देने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक सोमवार को होगी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस समिति की अध्यक्षता कर रहे हैं। समिति सोमवार की बैठक में गठन के समय से अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेगी। इसके अलावा देश की राजनीतिक पार्टियों की तरफ से दिए गए जवाब पर भी विचार किया जाएगा।
बैठक के पहले एजेंडा नहीं...
दरअसल, देश में एक साथ चुनाव कराने की संभावनाओं को तलाशने, जरूरी कानूनी बदलाव जैसे हालात का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में इस हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सोमवार को संभावित अनौपचारिक बैठक के पहले कोई लिखित एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन समझा जाता है कि बैठक के दौरान राजनीतिक दलों की तरफ से भेजी गई प्रतिक्रिया पर विचार किया जाएगा।
बैठक के लिए राजनीतिक दलों से आम सहमति बनाने की अपील
खबरों के अनुसार, समिति की पहली बैठक में देश के तमाम राजनीतिक दलों से वन नेशन वन इलेक्शन के विचार पर राय मांगने का फैसला लिया गया था। समिति ने पार्टियों से उनके विचार आमंत्रित किए थे। हाल ही में समिति ने राजनीतिक पार्टियों को पत्र लिखकर बैठक के लिए आम सहमति वाली तारीख तय करने की अपील की थी। बाद में प्रतिक्रिया भेजने के लिए पार्टियों को दोबारा भी चिट्ठी भेजी गई।
विधि आयोग से भी राय मांगी गई
समिति के गठन से जुड़ी खबरों के मुताबिक देश के छह राष्ट्रीय राजनीतिक दल, 33 राज्य स्तरीय पार्टियों और सात पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त दलों से भी उनके सुझाव मांगे गए थे। समिति के गठन के बाद इसने विधि आयोग की राय भी सुनी है। बीते अक्तूबर में हुई बैठक में विधि आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी ने कुछ सदस्यों के साथ देश में एक साथ चुनाव कराने के रोडमैप पर चर्चा के लिए उच्चस्तरीय समिति से मुलाकात की थी।
तीन महीने पहले बनाई गई समिति
माना जा रहा है कि वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर गठित कोविंद समिति किसी निष्कर्ष पर पहुंचने और सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले व्यापक मंथन करेगी। समिति की पहली बैठक सितंबर में हुई थी। केंद्र सरकार ने लोकसभा, विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे पर विचार कर सिफारिशें देने के लिए करीब तीन महीने पहले दो सितंबर, 2023 को आठ सदस्यीय 'उच्च स्तरीय' समिति बनाने का फैसला किया था।