एक देश-एक चुनाव की दिशा में केंद्र सरकार ने अपना कदम उठाते हुए एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों में दी गई है। कमेटी के गठन होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पूर्व राष्ट्रपति कोविंद से मिलने पहुंचे। नड्डा ने रामनाथ कोविंद को गुलदस्ता और एक किताब भेंट के तौर पर दी।
विपक्ष ने उठाया सवाल
एक देश-एक चुनाव के लिए कमेटी के गठन पर विपक्षी पार्टी काफी नाराज हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नेता अनिल देसाई का मानना है कि कि सरकार को इसके बारे में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मिलकर विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'एक देश-एक चुनाव का चाहे जो भी अवधारणा हो, उसे सभी राजनीतिक दलों के सामने रखने की जरूरत है। जिसके बाद इसपर विचार किया जाएगा। विचार-विमर्श और चर्चा के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।'
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर चुनाव को आगे बढ़ाने के साजिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ये एक चुनाव आगे करने के लिए एक साजिश है। ये लोग चुनाव कराना नहीं चाहते हैं, क्योंकि ये INDIA गठबंधन से डर गए हैं। यही वजह है कि ये नए नए फंडे लेकर आ रहे हैं।'
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक देश-एक चुनाव अपनी राय देते हुए कहा, 'यह केवल संविधान में संशोधन से संभव नहीं है और इसके लिए राज्यों को स्वीकृति देनी होगी। इससे भाजपा शासित प्रदेश जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र वहां उन्हें बस एक प्रस्ताव पारित करना है और विधानसभा भंग हो जाएगी।'
सीपीएम
केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने एक देश-एक चुनाव का विरोध करते हुए कहा, 'इस तरह के कदम से विविधता में एकता की धारणा के साथ समझौता हो रहा है। भाजपा कहीं न कहीं 'INDIA' गठबंधन से डरी हुई है। केंद्र सरकार का यह कदम हमारे देश के बुनियादी लोकतांत्रिक के खिलाफ है।'
पूर्व राष्ट्रपति को अध्यक्ष बनाने पर बवाल
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक देश-एक चुनाव की अध्यक्षता देने पर समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'एक देश-एक चुनाव कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति का चुनाव नहीं करना चाहिए था। पारंपरिक रूप से पूर्व राष्ट्रपति को किसी भी पद के लिए नियुक्त नहीं किया जा सकता है। अगर उन्होंने (सरकार) ने ऐसा किया है तो ये गलत है। पहले एक देश-एक चुनाव पर चर्चा करना चाहिए और फिर इसपर निर्णय लेना चाहिए।'
एक देश-एक चुनाव पर शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सवाल उठाया है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछते हुए कहा, 'मैं पूछती हूं कि कमेटी महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के अधिकारों, महिला आरक्षण, बेरोजगारी पर कब बनेगी? 3 कमेटी रिपोर्ट पहले ही आ चुकी हैं और वे कमेटी रिपोर्ट कहती हैं कि 5 संशोधन करने पड़ेंगे।'
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक देश-एक चुनाव कमेटी के अध्यक्ष बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, 'लोकतांत्रिक प्रक्रिया नियमों और परंपराओ से चलती है। अपना कार्यकाल पूरा कर चुके राष्ट्रपति सरकार के प्रति जवाबदेह हो या सरकार द्वारा गठित किसी कमेटी के अध्यक्ष बने हो ऐसा मुझे याद नहीं आता है।'
एक देश-एक चुनाव के लागू होने से राजनीतिक जानकारों के अनुसार इससे सबसे ज्यादा नुकसान क्षेत्रीय पार्टियों को होगा। दरअसल लोकसभा चुनाव में आमतौर पर मतदाता राष्ट्रीय मुद्दों के आधार पर और राष्ट्रीय पार्टी को वोट देना पसंद करते हैं। ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे तो हो सकता है कि क्षेत्रीय दलों को इसका नुकसान झेलना पड़े।