आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन (एचयूपीए) मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश के शहरी इलाकों में एक करोड़ से अधिक घरों में बाथरूम का अभाव है। हाल ही में संसद में आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार ‘लगभग एक करोड़ या लगभग 13 फीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं है।
उनकी पहुंच न तो सार्वजनिक शौचालय तक है और न ही यह सुविधा उनके घरों में है। 74.64 लाख घरों में बगैर छत वाले अहातों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि लगभग 1.42 करोड़ या 18 फीसदी परिवारों के घरों में अलग से रसोई घर की सुविधा नहीं है।’
इसमें संकेत दिया गया है कि ऐसा होने की वजह से इन परिवारों के सदस्य प्रदूषण के संपर्क में आते हैं, जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।