देश की राजनीति में सबसे बड़े सियासी यादव घराने के दो बड़े नाम शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव दोनों भाइयों में अदावत काफी पुरानी है। राजनीतिक फैसलों पर दोनों केबीच ज्यादातर मतभेद रहा है। कई बार यह मतभेद सामने भी आ चुकेहैं। दिल्ली में दोनों की लड़ाई के किस्से बन चुके हैं।
रामगोपाल को छह साल के लिए पार्टी से निकालने का फरमान संगठन के लिए बड़ा जरूर हैं लेकिन ज्यादा आश्चर्य वाला नहीं है। शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव चचेरे भाई है। दोनों का परिवार एक है, सियासी दल एक है लेकिन सियासी सोच हमेशा अलग और टकराव वाली रही। इससे वाकिफ मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल को लखनऊ और रामगोपाल को दिल्ली की राजनीति में लगा दिया। इसके बाद भी दोनों में खींचतान मची रहती थी। मसलन ठाकुर अमर सिंह का सपा से वनवास, उसके बाद वापसी पर इन दोनों केबीच का टकराव किसी से छिपा नहीं हैं। सपा केसूत्र अब यहां तक दावा कर रह है कि 2012 में अखिलेश की बतौर सीएम मुलायम के पेश करने पर शिवपाल को एतराज था, लेकिन रामगोपाल पक्ष में थे।
हाल ही में तीन मुद्दों पर मतभेद खुलकर सामने आ गया था। पहले अजित सिंह के दल रालोद से चुनावी गठबंधन करने केपक्ष में शिवपाल यादव थे, लेकिन रामगोपाल यादव ने खुलकार विरोध किया था। मुलायम केदरबार में मामला जाने के बाद भी गठंबधन नहीं हो सका। दूसरा कौमी एकता दल से सपा में विलय केपक्ष में शिवपाल रहे जबकि विरोध में रामगोपाल। रामगोपाल के साथ खड़े दिखे अखिलेश यादव। तीसरे मामले में अमर सिंह की सपा में हुई वापसी को लेकर रामगोपाल यादव लगातार विरोध करते रहे, लेकिन शिवपाल यादव ने उनकी वापसी की पूरी पथकथा लिख डाली और कामयाब भी रहे। अखिलेश और शिवपाल को लेकर चल रही जंग में भी रामगोपाल खुलकर अखिलेश का साथ दे रहे हैं। वह लगातार पत्र लिखकर सपा प्रदेशाध्यक्ष से अखिलेश को हटाने समेत तमाम मौकों पर दोनों चचेरे भाइयों में विवाद सामने आते रहे हैं।