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Pinarayi Vijayan: कभी केरल की राजनीति के सबसे ताकतवर नेता थे पिनाराई विजयन, अब कैसे आए ईडी की जांच के घेरे में

Wed, 27 May 2026 12:34 PM IST
रिया दुबे तिरुवनंतपुरम, आईएएनएस

सार

पिनाराई विजयन को कभी केरल की राजनीति का सबसे ताकतवर नेता माना जाता था। सीपीआईएम और सरकार दोनों पर उनकी मजबूत पकड़ थी और विरोधी नेता भी उनके सामने कमजोर पड़ जाते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में ईडी ने उनके तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित घरों पर छापेमारी की है। कभी सत्ता और संगठन पर पूरा नियंत्रण रखने वाले विजयन अब केंद्रीय एजेंसियों की जांच और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

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केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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एक दौर था जब केरल को पूर्व सीएम पिनाराई विजयन को केरल की राजनीति का सबसे ताकतवर चेहरा माना जाता था। सीपीआईएम के भीतर उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि पार्टी में उनके खिलाफ खुलकर आवाज उठाना लगभग असंभव माना जाता था। कन्नूर जिले के एक प्रभावशाली संगठनकर्ता से लेकर राज्य की राजनीति के सबसे बड़े वामपंथी नेता बनने तक का उनका सफर लंबे समय तक शक्ति, अनुशासन और राजनीतिक नियंत्रण का प्रतीक रहा। लेकिन अब वही पिनाराई विजयन प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की तलाशी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

सीपीआईएम के नेता पर हुई यह पहली बड़ी कार्रवाई 

तिरुवनंतपुरम और कन्नूर स्थित उनके आवासों पर ईडी की छापेमारी ने केरल की राजनीति में बड़ा प्रतीकात्मक संदेश दिया है। यह शायद पहली बार है जब सीपीआईएम के एक वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य और दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री को अपने करीबी परिवार से जुड़े वित्तीय मामले में केंद्रीय एजेंसी की ऐसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
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राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सीपीआईएम जैसी पार्टी, जिसने हमेशा संगठनात्मक नैतिकता और वैचारिक अनुशासन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया, उसके लिए यह घटनाक्रम सिर्फ कानूनी मामला नहीं बल्कि राजनीतिक और नैतिक चुनौती भी बन गया है।
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विजय ने कैसे अपनी पैठ जमाई?

1998 के बाद से पिनाराई विजयन ने पार्टी और सरकार दोनों पर मजबूत पकड़ बना ली थी। सीपीआईएम के भीतर उनके विरोधी धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए। कई बड़े नेता, जो कभी उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे, समय के साथ कमजोर पड़ते गए और विजयन केरल की वाम राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे।

विजयन ने कौन सा राजनीतिक ट्रेंड तोड़ा?

साल 2021 में मिली ऐतिहासिक चुनावी जीत ने उनकी ताकत को और बढ़ा दिया। करीब चार दशक पुराने उस राजनीतिक ट्रेंड को तोड़ते हुए, जिसमें केरल में हर पांच साल में सत्ता बदल जाती थी, विजयन के नेतृत्व में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटा। उस समय माना जा रहा था कि पार्टी और सरकार दोनों में उनका प्रभाव लगभग अजेय हो चुका है।

इस साल के विधानसभा चुनाव में मिली हार 

लेकिन राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। पिछले महीने विधानसभा चुनाव में सीपीआईएम को मिले बड़े झटके ने पहली बार विजयन की राजनीतिक छवि को कमजोर किया। अब सत्ता विपक्ष के नेता वीडी सतीशान के नेतृत्व वाले नए राजनीतिक समीकरणों की ओर बढ़ चुकी है और विजयन के पास वह प्रशासनिक ताकत नहीं रही, जो लंबे समय तक उन्हें राजनीतिक सुरक्षा देती रही।

राज्य पुलिस और ईडी के बीच विजयन के कार्यकाल में रहा टकराव 

दिलचस्प बात यह है कि जब पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री थे, तब केरल ने राज्य पुलिस और ईडी के बीच अभूतपूर्व टकराव देखा था। गोल्ड स्मगलिंग केस के दौरान केरल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया था। विपक्ष ने उस समय आरोप लगाया था कि राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

विजयन के समर्थन में सीपीआईएम सड़क पर उतरी

अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में ईडी की जांच तेज होने के बाद विजयन की रणनीति फिलहाल कानूनी लड़ाई और राजनीतिक विरोध तक सीमित दिखाई दे रही है। सीपीआईएम पहले ही सड़कों पर उतर चुकी है और पार्टी का आरोप है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच एक राजनीतिक समझ के तहत विजयन को निशाना बनाया जा रहा है।

 
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