राहुल गांधी के कर्नाटक चुनाव संबंधी आरोपों पर भारत निर्वाचन आयोग करारा जवाब दिया है। चुनाव आयोग ने कहा कि अगर चुनाव याचिका दायर की गई है तो माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा, तो अब बेबुनियाद आरोप क्यों लगा रहे हैं?
इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार को दावा किया कि कांग्रेस के पास इस बात के 100 फीसदी सबूत हैं कि चुनाव आयोग ने कर्नाटक के एक निर्वाचन क्षेत्र में धांधली होने दी। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि वह इससे बच नहीं पाएंगे, क्योंकि हम ऐसा होने देंगे और आपके पीछे आएंगे। इस पर चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा कि अगर चुनाव याचिका दायर की गई है, तो माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करें। अगर नहीं, तो अब बेबुनियाद आरोप क्यों लगा रहे हैं?
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने कहा, 'जहां तक कर्नाटक लोकसभा 2024 की मतदाता सूची की बात है, कर्नाटक के डीएम या सीईओ के पास एक भी अपील दायर नहीं की गई थी, जो आरपी अधिनियम 1950 की धारा 24 के तहत कांग्रेस के लिए उपलब्ध एक वैध कानूनी उपाय है। जहां तक लोकसभा चुनाव 2024 के संचालन की बात है तो 10 चुनाव याचिकाओं में से आरपी अधिनियम 1951 की धारा 80 के तहत कांग्रेस के लिए उपलब्ध कानूनी उपाय के रूप में किसी भी हारने वाले कांग्रेस उम्मीदवार की ओर से एक भी चुनाव याचिका दायर नहीं की गई थी। ईसीआई हैरान है कि सीईसी के खिलाफ इस तरह के निराधार और धमकी भरे आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं और वह भी अब?'
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा, 'जैसा कि भारत के चुनाव आयोग की ओर से पहले ही सूचित किया जा चुका है, मतदाता सूचियां सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाती हैं। विशेष संशोधन-2024 के दौरान, जो लोकसभा आम चुनाव-2024 से पहले किया गया था, सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों की मसौदा और अंतिम मतदाता सूचियों की प्रतियां कांग्रेस सहित सभी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को प्रदान की गईं। मतदाता सूचियों के मसौदा और अंतिम प्रकाशन के बीच विचार के लिए 9,17,928 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुईं। कानून के अनुसार, मतदाता सूचियों में गलत नाम जुड़ने या कटने के विरुद्ध अपील दायर की जा सकती है। हालांकि, कोई अपील प्राप्त नहीं हुई।'
'भारत के चुनाव आयोग की तरह काम नहीं कर रहा ECI'
दरअसल, चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के अंदर फैसले से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति चुनाव याचिका दायर कर सकता है। ऐसी याचिकाएं संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के राज्य के उच्च न्यायालयों में दायर की जा सकती हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भारत के चुनाव आयोग की तरह काम नहीं कर रहा है। वह अपना काम ही नहीं कर रहा है।
'100 प्रतिशत ठोस सबूत'
जब राहुल से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और राजद नेता तेजस्वी यादव की बिहार विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने के विकल्प वाली टिप्पणी के बारे में पूछा गया उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी के पास कर्नाटक की एक सीट पर चुनाव आयोग की ओर से धोखाधड़ी की अनुमति देने के 100 प्रतिशत ठोस सबूत हैं।
विपक्ष क्यों कर रहा SIR का विरोध?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दल मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह मतदाताओं, खासकर हाशिए पर पड़े समुदायों के लोगों को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनावों के नतीजों पर पड़ सकता है।