Vice President M. Venkaiah Naidu
- फोटो : Amar Ujala
दुनिया भर में 50वें वर्ल्ड अर्थ डे को मनाया जा रहा है। ऐसे में पृथ्वी दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने लोगों से उपभोक्तावादी जीवनशैली को बदलने और विकास की अवधारणाओं पर पुनर्विचार करने को कहा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण अनुकूल नीतियां अपना कर ही हमारा भविष्य प्रकृति सम्मत विकास पर निर्भर करेगा। उन्होंने आगे कहा कि जरूरी है कि हम अक्षय ऊर्जा स्रोतों, पर्यावरण सम्मत ग्रीन बिल्डिंग, प्रदूषण मुक्त स्वच्छ टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर अग्रसर हो।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने स्थानीय समुदायों से रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकिल के मंत्र को अपनाने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सभी नागरिकों से पृथ्वी को हरा भरा स्वच्छ ग्रह बनाने का निवेदन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हर एक का पुनीत नागरिक कर्तव्य है। पृथ्वी दिवस के अवसर पर अपने संदेश में उन्होंने कहा, " हमें प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए, अपनी उपभोक्तावादी जीवन शैली में परिवर्तन करना चाहिए और विकास की अपनी अवधारणा पर दोबारा विचार करना चाहिए"।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के अनुभव के बाद हमें अपनी विकास और आर्थिक नीतियों की नए सिरे से दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। इसके साथ ही विकास की नई अवधारणा को विकसित करना चाहिए।
कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दुनिया भर के स्वास्थ्य आपदा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि लंबी अवधि की व्यापक बंदी ने पूरी दुनिया को थाम सा दिया है, जिससे प्रदूषण के स्तरों में गिरावट देखी जा रही है, वायु अधिक स्वच्छ हो गई है, हमें समझना चाहिए कि मानव ने किस हद तक प्राकृतिक संतुलन को हानि पहुंचाई है।