देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान
एम्स के मॉडल की तर्ज पर पूरे देश में गंभीर रोग से पीड़ित लोगों की देखभाल की जाएगी। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय पैलीएटिव (पीड़ा दूर करने) पॉलिसी तैयार की है। एम्स इस दिशा में पिछले तीन साल से काम कर रहा है। इस मॉडल के तहत राज्य स्तर के साथ ही जिला स्तर के
अस्पतालों में पैलीएटिव केयर की व्यवस्था होगी।
पैलिटिव केयर के तहत कैंसर जैसे गंभीर व जानलेवा रोग से पीड़ित मरीजों को नियमित इलाज के साथ ही विशेष देखभाल के जरिये उनका दर्द दूर किया जाता है। इसका उद्देश्य रोगी के साथ ही उसके परिवार के जीवन गुणवत्ता में सुधार करना होता है। इसके तहत विशेषज्ञ मरीज के परिजनों की भी काउंसलिंग करते हैं। साल 2012 में सबसे पहले मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल और फिर एम्स में इस तरह की पहल शुरू हुई थी।
एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि देश में कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता के बावजूद अभी भी अस्पतालों में मरीज देरी से पहुंच रहे हैं। इससे उनके बचने की संभावना काफी कम हो रही है। ऐसे मरीजों को अस्पताल में रखना भी ठीक नहीं। इससे अच्छा उन्हें घर पर देखरेख मिल सकती है। इससे देश के सरकारी अस्पतालों में 50 फीसदी रोगियों का भार कम हो जाएगा।
डॉ. सुषमा भटनागर ने बताया कि एम्स में हर साल पैलीएटिव केयर को लेकर डॉक्टरों व नर्सों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। डॉ. सुषमा ने बताया कि एम्स में पैलीएटिव का असर दिखने लगा है। अंदाज है कि हर दिन कम से कम एक मरीज को घर जरूर भेज पा रहे हैं। अभी फेफड़ों में संक्रमण से ग्रसित मरीजों के परिजनों की काउंसिलिंग पर जोर दिया जा रहा है।