अयोध्या के राम मंदिर मामले में बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए शुरू हुई आध्यात्मिक गुरू श्रीश्री रविशंकर की पहल सियासी विवादों में घिर गई है। कांग्रेस पार्टी ने जहां श्रीश्री पर व्यक्तिगत तंज कसा है। तो विश्व हिन्दू परिषद को भी श्रीश्री की पहल पर आशंका है कि वह सफल होगी अथवा नहीं।
हालांकि भाजपा को अब भी विश्वास है कि श्रीश्री की पहल सफल होगी। बल्कि भाजपा ने उल्टे श्रीश्री की पहल पर सवाल उठाने वालों को कटघरे में घेरा है। इस बीच सरकार ने श्रीश्री से दूरी बरतने का प्रयास किया है। ताकि उनके प्रयास पर सरकारी रंग न दिखे।
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यही वजह है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मंगलवार को होने वाली श्रीश्री की मुलाकात ऐन मिनट में टाली गई। बताया जा रहा है कि श्रीश्री के साथ केंद्र सरकार की नजदीकी न दिखे। इसलिए गृह मंत्री से उनकी होने वाली मुलाकात स्थगित कर दी गई। उन्हें अजमेर शरीफ के धार्मिक प्रमुख के साथ मंगलवार शाम 4 बजे राजनाथ से मिलना था। मगर यह मुलाकात नहीं हो सकी।
गृहमंत्री से मुलाकात पर भाजपा सांसद की सफाई
गृहमंत्री से श्रीश्री के मुलाकात पर उनके करीबी कहे जाने वाले भाजपा नेता एवं सांसद महेश गिरी ने अमर उजाला को बताया है कि अजमेर शरीफ के चिश्ती महोदय ने श्रीश्री से आग्रह किया था कि वे उनके साथ गृह मंत्री से मिलने चलें। मगर श्रीश्री का लखनऊ जाने का कार्यक्रम पहले से तय था।
इसलिए गृह मंत्री से मिलने का उनका कार्यक्रम संभव नहीं हो सका। हालांकि गिरी को विश्वास है कि श्रीश्री अपने मकसद में सफल होंगे। श्रीश्री के पहल पर सवाल उठा रहे लोगों को जवाब देते हुए महेश गिरी ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर ने पहले भी विश्व स्तर पर कई प्रयास किए हैं। जिसमें वे सफल रहे हैं।
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गिरी के अनुसार खुद कोलंबिया के राष्ट्रपति यह बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि श्रीश्री के पहल से उनके यहां 60 वर्षों से चली आ रही दो समूहों के बीच का विवाद खत्म हुआ है। गिरी की मानें तो श्रीश्री ने इराक और जम्मू-कश्मीर में भी पहल कर हालात सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।