फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेल कीमतों में भेदभाव का मसला उठाने पर देवड़ा को मिली थी मनमोहन की फटकार

Tue, 01 Nov 2016 04:34 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : file photo
विज्ञापन
तेल निर्यातक देशों द्वारा भारत समेत एशियाई देशों के साथ लंबे समय से रंगभेद नीति अपनाई जा रही है लेकिन पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने जब यही मुद्दा इस क्षेत्र के सबसे बड़े निर्यातक सऊदी अरब के शासक के समक्ष उठाया, उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फटकार लगा दी थी। इसका खुलासा वरिष्ठ पत्रकार राजीव जायसवाल की पुस्तक ‘द लॉबिइस्ट: अनटोल्ड स्टोरी ऑफ आयल, गैस एंड एनर्जी सेक्टर’ में किया गया है।
विज्ञापन


पुस्तक के मुताबिक, पिछले कई दशकों से पश्चिम एशियाई तेल उत्पादक देश अमेरिका या यूरोपीय रिफाइनरी कंपनियों की तुलना में भारत जैसे एशियाई ग्राहकों से प्रति बैरल 6 डॉलर अधिक मूल्य वसूलते आ रहे हैं। इस मूल्य को सऊदी अरब जैसे देशों ने अपने अलग-अलग आधिकारिक मूल्यों (ओएसपी) को ‘एशियन प्रीमियम’ का नाम दिया है। हालांकि भारत द्वारा तेल आयात के लिए अरबों डॉलर के भुगतान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं रखा जाता है।

पुस्तक में बताया गया है कि सबसे पहले यह मुद्दा तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने उठाया था। विएना में तेल उत्पादक देशों (ओपेक) की  सितंबर 2004 में आयोजित बैठक में उन्होंने एशियाई खरीदारों बनाम यूरोपीय एवं अमेरिकी रिफाइनरी कंपनियों से तेल कीमत लेने में भेदभाव का मुद्दा उठाया था। पुस्तक के मुताबिक, ‘मजे की बात है कि एशियन प्रीमियम से सभी वाकिफ थे लेकिन किसी भी द्विपक्षीय चर्चा में इस मुद्दे को एकमत से नहीं उठाया गया। इस मुद्दे को हमेशा दबाकर रखा गया और खाड़ी के कई तेल उत्पादक देश, खासकर सऊदी अरब सार्वजनिक मंच पर इससे अनजान बने रहे।’
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

प्रधानमंत्री के इस व्यवहार से देवड़ा काफी क्षुब्ध थे

- फोटो : getty
अय्यर की तरह ही 27 फरवरी से 1 मार्च 2010 के दौरान सऊदी अरब के दौरे पर गए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ गए पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने वहां के शासक अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज के समक्ष उठाया। पुस्तक के मुताबिक, सऊदी के शाह ने हमेशा की तरह इस बार भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। लेकिन बाद में इसी बात को लेकर उन्हें यह कहते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री ने फटकार लगाई थी कि यह मुद्दा एजेंडे में नहीं था।

पुस्तक का दावा है कि देवड़ा ने इस घटनाक्रम की पुष्टि भी की और कहा कि प्रधानमंत्री के इस व्यवहार से वह काफी क्षुब्ध थे। इसी साल मार्च में देवड़ा ने पुस्तक के लेखक जायसवाल को बताया था, ‘सऊदी अरब हम खाने और मजे करने नहीं गए थे। पेट्रोलियम मंत्री होने के नाते यह मुद्दा उठाना मेरा फर्ज था। उन्हें मेरा समर्थन करना चाहिए था।’

भारतीय रिफाइनरी कंपनियों का मानना है कि यदि कच्चा तेल अमेरिकी और यूरोपीय देशों के मूल्यों पर ही बेचा जाए तो उनका रिफाइनिंग मार्जिन प्रति बैरल 2 डॉलर बढ़ जाएगा। भारत ने 2015-16 के दौरान 4.16 लाख करोड़ रुपये मूल्य चुकाकर लगभग 20.03 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया है। सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने 3 जून 2015 को यह मुद्दा उठाया और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओपेक सेमिनार में इस पर चर्चा छेड़ी। पुस्तक में लेखक ने सत्ता के गलियारों में शासन-तंत्र की गतिविधियों की झलक पेश की है और बताया है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की दिलचस्पी के बीच विभिन्न हितधारी समूहों के बीच कैसी घातक प्रतिद्वंद्विता मची हुई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें