तेल निर्यातक देशों द्वारा भारत समेत एशियाई देशों के साथ लंबे समय से रंगभेद नीति अपनाई जा रही है लेकिन पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने जब यही मुद्दा इस क्षेत्र के सबसे बड़े निर्यातक सऊदी अरब के शासक के समक्ष उठाया, उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फटकार लगा दी थी। इसका खुलासा वरिष्ठ पत्रकार राजीव जायसवाल की पुस्तक ‘द लॉबिइस्ट: अनटोल्ड स्टोरी ऑफ आयल, गैस एंड एनर्जी सेक्टर’ में किया गया है।
पुस्तक के मुताबिक, पिछले कई दशकों से पश्चिम एशियाई तेल उत्पादक देश अमेरिका या यूरोपीय रिफाइनरी कंपनियों की तुलना में भारत जैसे एशियाई ग्राहकों से प्रति बैरल 6 डॉलर अधिक मूल्य वसूलते आ रहे हैं। इस मूल्य को सऊदी अरब जैसे देशों ने अपने अलग-अलग आधिकारिक मूल्यों (ओएसपी) को ‘एशियन प्रीमियम’ का नाम दिया है। हालांकि भारत द्वारा तेल आयात के लिए अरबों डॉलर के भुगतान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं रखा जाता है।
पुस्तक में बताया गया है कि सबसे पहले यह मुद्दा तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने उठाया था। विएना में तेल उत्पादक देशों (ओपेक) की सितंबर 2004 में आयोजित बैठक में उन्होंने एशियाई खरीदारों बनाम यूरोपीय एवं अमेरिकी रिफाइनरी कंपनियों से तेल कीमत लेने में भेदभाव का मुद्दा उठाया था। पुस्तक के मुताबिक, ‘मजे की बात है कि एशियन प्रीमियम से सभी वाकिफ थे लेकिन किसी भी द्विपक्षीय चर्चा में इस मुद्दे को एकमत से नहीं उठाया गया। इस मुद्दे को हमेशा दबाकर रखा गया और खाड़ी के कई तेल उत्पादक देश, खासकर सऊदी अरब सार्वजनिक मंच पर इससे अनजान बने रहे।’