सीमा पर स्नाइपर्स की मदद से भारतीय जवानों को निशाना बनाने की घटना के बाद भारतीय सेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सेना ने स्नाइपर अभियान की तुलना जवानों का मनोबल गिराने के लिए सिर काटने जैसी घटना को अंजाम देने से की है। साथ ही यह साफ कर दिया है कि पाकिस्ना ने इसका बदला लिया जाएगा। शुक्रवार को पाकिस्तानी स्नाइपर्स द्वारा कुपवाड़ा जिले में किए हमले में सेना के दो जेसीओ शहीद हो गए थे।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'लाइन ऑफ कंट्रोल पर इस्तेमाल होने वाले भारी हथियारों जैसे कि मोर्टार, लाइट आर्टिलरी और एंटी टैंक मिसाइल की तुलना में स्निपिंग सबसे ज्यादा प्रभाव डालती है। इससे कमांडरों और जवानों के बीच एक तरह का भय बना रहता है।' इसलिए भारतीय सेना अपने दो जेसीओ की शुक्रवार को हुई हत्या का बदला लेगी। एक दूसरे अधिकारी ने कहा, 'हम समय और जगह का चुनाव करेंगे। हमने इस तरह के स्निपिंग ऑपरेशन को अतीत में पहले भी अंजाम दिए हैं।'
इन सभी के बीच एक अहम तथ्य यह भी है कि भारतीय सेना के पास अभी भी रूस की पुरानी 7.62एमएम ड्रैगनोव सेमी-ऑटोमेटिक स्नाइपर राइफल्स हैं। जिनकी एक सीमित रेंज (800 मीटर) है। 1960 के दशक में इन्हें डिजायन किया गया था। कई सालों से सेना 5719 8.6एमएम स्नाइपर राइफल को खरीदना चाह रही है। इस राइफल की मारक क्षमता 1200 मीटर है। इन राइफल के अधिग्रहण की परियोजना को रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा फरवरी में स्वीकार किया गया था।
इन स्नाइपर राइफलों की अनुमानित लागत 982 करोड़ रुपये है। प्रक्रिया फिलहाल शुरुआती चरण यानी टेंडर स्टेज पर है। इसका मतलब यह है कि कॉन्ट्रैक्ट को पूरा होने में अभी तीन से चार सालों का वक्त लगेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ड्रैगनोव राइफल को कई आधुनिक चीजों से लैस किया गया है मगर इनकी गोलियां काफी महंगी होती हैं। उन्होंने कहा कि स्नाइपिंग को मजबूत बनाने के लिए नई मॉड्युलर राइफल और इसके गोला-बारूद के घरेलू उत्पादन की व्यवस्था को शुरू करने की तत्काल जरूरत है।