अटल जी को जानने वाले 6ए, कृष्णा मेनन मार्ग से अच्छी तरह से परिचित होंगे। 16 अगस्त को अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि मनाई जा रही है। कृष्णा मेनन मार्ग से गुजरने वाले एक बार इस बंगले की ओर जरूर देख रहे थे। भले ही चंद सेकेंड के लिए ही सही, उनकी नजर इस बंगले पर जा रही थी। अगर कोई गाड़ी में है तो उसकी रफ़्तार अपने आप कम होने लगती और गर्दन 6ए की ओर घूम जाती।
पिछले साल जबरदस्त थी गहमागहमी
पिछले साल आज ही के दिन यानी 16 अगस्त को कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित इस बंगले में सुबह से ही लोगों की गहमागहमी थी। कृष्णा मेनन मार्ग पर ट्रैफ़िक की आवाजाही बंद कर दी गई थी। दोपहर बाद जब वह दुखःद सूचना आई कि अब अटल जी नहीं रहे, तो यहां उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अनेक केंद्रीय मंत्री पहुंचने लगे।
अमित शाह को हुआ आवंटित
हाल ही में इस बंगले को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को आवंटित किया गया है। बंगले में मरम्मत का काम चल रहा है। सामने लगे बेरिकेड हट चुके हैं और अब एसपीजी सुरक्षा भी यहां नहीं है। पिछले साल आज ही के दिन यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात थे। पूर्व प्रधानमंत्री होने के नाते अटल जी को एसपीजी मिली हुई थी। उनके निधन के बाद यहां पीएम नरेंद्र मोदी और दूसरे मंत्रियों को आना था, इसलिए एसपीजी के अलावा एनएसजी के कमांडो भी तैनात किए गए थे।
लोग लेते थे सेल्फी
लेकिन शुक्रवार को यह बंगला सूना पड़ा था। दोनों तरफ के गेटों पर सुरक्षा कर्मी तैनात थे। 16 अगस्त 2018 को जो माहौल था, वह आज नहीं है। बंगले के बाहर अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लिखा था और लोग एसपीजी वालों से पूछकर लोग इस बंगले के सामने खड़े होकर सेल्फी ले लेते थे।
छह नंबर को मानते थे लकी
बताया जाता है कि वाजपेयी जी को छह नंबर बहुत पसंद था। वे इस नंबर को लकी मानते थे। यही वजह रही कि उनके सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने के बाद तत्कालीन सरकार ने कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित आठ नंबर बंगले को 6ए का नाम दे दिया। 6ए के साथ ही छह नंबर बंगला है, जहां बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन का कार्यालय भी है।