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ICMR के एक्सपर्ट पैनल का दावा: ओमिक्रॉन जल्दी फैलता है, इसलिए घातक नहीं है!

आशीष तिवारी
Updated Sat, 04 Dec 2021 02:26 PM IST

सार

डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि जिन बदले हुए स्वरूपों में लक्षण बहुत हल्के होते हैं और उनमें संक्रामक क्षमता ज्यादा होती है, वह अपना असर नहीं दिखा पाते हैं। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि जो वायरस बहुत घातक होगा और अपने होस्ट (संक्रमित व्यक्ति) को ही मार डाले, तो ऐसे में मृतक व्यक्ति से संक्रमण फैलने का खतरा न के बराबर होता है...
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डॉ. समीरन पांडा - फोटो : Amar Ujala (File Photo)


ज्यादा वैक्सीनेशन और गाइडलाइन ही बचाव

डॉक्टर समीरन पांडा का दावा है कि जितने भी मामले भारत में सामने आएंगे, उन सब से निपटने के लिए ज्यादा वैक्सीनेशन और कोविड से बचने के लिए तैयार की गई गाइडलाइन ही सबसे बड़ा बचाव हैं। उन्होंने बताया कि क्योंकि यह वैरिएंट भी उसी तरीके से फैलता है जैसे कि पुराना वैरिएंट फैलता था। पुराने वैरिएंट से बचने के जो उपाय और तौर-तरीके थे, वे इस वेरिएंट में भी लागू और प्रभावी होते हैं। ऐसे में बेहतर है कि लोग डरने की बजाए इस महामारी से बचने के लिए बताए गए उपायों का पालन करें।



पूरी दुनिया में सबसे पहले ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता लगाने वाली साउथ अफ्रीकन मेडिकल एसोसिएशन की चेयरपर्सन डॉक्टर एंजेलिक कोएट्जी का दावा है कि इस वैरिएंट के फैलने की क्षमता पुराने वैरिएंट के मुकाबले बहुत ज्यादा है, लेकिन यह उतना घातक नहीं है जितना डेल्टा था। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डॉ कोएट्जी का दावा है कि शुरुआती लक्षण पता चलने पर मरीज को अस्पताल में दाखिल होने तक की भी जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि यह शुरुआती लक्षण डेल्टा वैरिएंट के लक्षणों से बिल्कुल अलग हैं।

साउथ अफ्रीका में कुछ इस तरह फैला ओमिक्रॉन

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में डॉक्टर कोएट्जी की ओर से दावा किया गया है कि शुरुआती दिनों में उन्होंने 24 घंटे के भीतर 11,000 से ज्यादा मरीज को संक्रमित किया था। हालांकि उनकी ओर से राहत भरी जानकारी यह जरूर मीडिया रिपोर्ट में आई है कि इसमें वैक्सीन सबसे ज्यादा कारगर है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का भी कहना है कि इस वैरिएंट में वैक्सीन पूरी तरीके से कारगर है।

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