प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि अति पिछड़े जिलों के विकास में उम्रदराज जिलाधिकारी एक बड़ी बाधा हैं। देश के 115 से अधिक अल्प विकसित जिलों में 80 फीसदी से अधिक जिलाधिकारी 40 वर्ष से अधिक आयु के हैं।
पीएम ने कहा कि विकास के लिए ऐसे युवा जिलाधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए जो सीधे तौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से चुने जाते हैं, न कि राज्य कैडर से पदोन्नत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को इन जगहों पर भेजा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अमूमन एक जिलाधिकारी की औसत आयु 27-30 वर्ष होती है लेकिन एक बैठक में इन 115 जिलों के 80 फीसदी उम्रदराज अधिकारियों को देखकर वह दंग रह गए। उम्रदराज अधिकारियों की परिवार और कॅरिअर को लेकर कई सारी समस्याएं रहती हैं। इन पिछड़े जिलों में ऐसे किसी अधिकारी को तैनात नहीं कर देना चाहिए।
इन जिलों के पिछड़ेपन की वजह जानना जरूरी है। जिस तरह मधुमेह के किसी रोगी की पहचान होते ही उसकी बीमारी दूर की जा सकती है, वैसे ही इन जिलों की वजह जान ली जाए तो 80 से 85 फीसदी समस्याएं आसानी से दूर हो जाएंगी।
संसद के केंद्रीय कक्ष में ‘विकास के लिए हम’ विषय पर आयोजित सांसदों एवं विधायकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने सर्वांगीण विकास के संदर्भ में सामाजिक न्याय की दिशा में उठाए गए कदमों का जिक्र किया।
मोदी ने कहा कि विकास की कमी का कारण बजट या संसाधन की कमी नहीं बल्कि सुशासन का अभाव रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए सुशासन, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पूर्ण ध्यान के साथ गतिविधियां चलाना आवश्यक है।