पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) बहाली की मांग को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन अब लामबंद होने लगे हैं। मौजूदा समय में केवल तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में पुरानी पेंशन व्यवस्था चालू है। हालांकि पश्चिम बंगाल में पहले से ही पुरानी पेंशन दी जा रही है, जबकि राजस्थान व छत्तीसगढ़ में गत विधानसभा चुनाव के दौरान पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा की गई थी। अखिल भारतीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने रविवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया है। मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि अब केंद्र व बाकी बचे राज्यों में पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्ष का बिगुल बजेगा। इतना ही नहीं, अगले साल दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के लाखों सरकारी कर्मी पुरानी पेंशन के लिए हुंकार भरेंगे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पुरानी पेंशन का मुद्दा अहम रहेगा।
अखिल भारतीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदीप सरल के मुताबिक, जंतर मंतर पर आयोजित धरने में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे हैं। इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुरानी पेंशन बहाली के लिए ज्ञापन भेजा गया है। इस राष्ट्रीय स्तर के धरना प्रदर्शन में शामिल होने आए पंजाब के जसबीर तलवाड़ा, जम्मू-कश्मीर के भूपेंद्र सिंह, तेलंगाना के संपत कुमार स्वामी, राजस्थान के राकेश कुमार और उत्तर प्रदेश के पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष क्रांति सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार व राज्यों को पुरानी पेंशन बहाल करनी होगी।
केंद्र सरकार ने 01 जनवरी 2004 से पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर दिया था। यहां तक कि केंद्रीय अर्धसैनिक बल भी पेंशन दायरे से बाहर कर दिए गए। इसके बाद राज्य सरकारें भी उसी राह पर चल पड़ीं। पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी प्रदेशों में पुरानी पेंशन बंद हो गई। अब दोबारा से सरकारी कर्मियों के संगठन पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन कर रहे हैं। देश के 77 लाख सरकारी कर्मचारी लगातार, प्रांतीय व राष्ट्रीय सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के करीब 14 लाख सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि पूरे देश से बड़ी संख्या में शिक्षक कर्मचारी भी धरने में शामिल हो रहे हैं।
इन कर्मियों ने पीएफआरडीए के खिलाफ प्रदर्शन किया है। हाल ही में राजस्थान सरकार को पीएफआरडीए ने 39 हजार करोड़ देने से मना कर दिया। कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, नई पेंशन स्कीम पूर्णतया शेयर बाजार आधारित है। इसमें कर्मचारी को न तो आर्थिक सुरक्षा और न ही सामाजिक सुरक्षा मिलती है। कर्मचारी, नई पेंशन स्कीम को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करना चाहते। केंद्र एवं राज्य सरकारों को अपनी हठधर्मिता छोड़कर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर देनी चाहिए। अगर सरकार पुरानी पेंशन बहाल नहीं करती है तो आने वाले समय में सभी राज्यों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही केंद्र एवं राज्यों के कर्मचारी संगठन मिलकर, अगले साल रामलीला मैदान में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ भी 'पुरानी पेंशन व्यवस्था' बहाली की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख चुका है। उस पत्र में एनपीएस यानी 'नई पेंशन योजना' को खत्म करने की मांग की गई है। साथ ही कर्मचारी नेता ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार अगर एनपीएस को खत्म नहीं करना चाहती, तो उसे कर्मियों को 'शर्तिया न्यूनतम पेंशन' जो कि अंतिम वेतन का आधा हो, प्रदान करनी होगी। उस पेंशन को महंगाई राहत भत्ते से भी जोड़ना होगा। अगर केंद्र सरकार जल्द ही ये मांग पूरा नहीं करती है, तो आगामी नवंबर में विभिन्न विभागों के लाखों कर्मचारी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे। बीपीएमएस के महासचिव मुकेश कुमार ने कहा, जिन केंद्रीय कर्मियों को एनपीएस में शामिल किया गया है, उनमें रोष व्याप्त है। कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना, केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन पेंशन बहाली के लिए एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह भी लगातार मांग उठा रहे हैं।