ओल्ड एज यानी साठ साल से ऊपर की उम्र को लोग परेशानी का कारण समझने लगते हैं, लेकिन अगर थोड़ी सी समझदारी से काम लिया जाए तो यही उम्र बुजुर्गों के लिए ‘गोल्डन एज’ और परिवार के लिए ‘गोल्ड’ यानी एक धन का काम कर सकती है। यह कहना है मेट्रो अस्पताल के सीनियर डॉक्टर पुनीत गुप्ता का।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक बुजुर्ग परिवार के लिए एक भावनात्मक सहारा होते हैं। वे बच्चों के काम पर जाने की स्थिति में घर की देखभाल भी करते हैं। घर के बच्चों की देखरेख करते हैं जो उनके भावनात्मक विकास के लिए बेहद जरुरी है। अकेलेपन में पल रहे बच्चों के साथ तमाम तरह की समस्याएं देखी जाती हैं जो दादा-दादी या नाना-नानी के साथ पल रहे बच्चों के साथ नहीं होतीं। इसलिए हर विशेषज्ञ आपको अपने माता-पिता को अपने साथ ही रखने की सलाह देता है। हमें उनकी और उनके स्वास्थ्य की चिंता करनी चाहिए। वृद्धावस्था में बुजुर्गों का स्वास्थ्य बहुत संवेदनशील रहता है। लेकिन थोड़ा सा ध्यान रखने पर उन्हें स्वस्थ रखा जा सकता है।
डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा कि बुजुर्गों का स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए उन्हें दिन में पांच बार थोड़ा-थोड़ा भोजन देना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां और फल अवश्य होना चाहिए। बुजुर्गों को दूध देने से बिल्कुल बचना चाहिए क्योंकि इस उम्र में अक्सर ‘लैक्टोज इनटॉलरेंस’ हो जाती है जिसकी वजह से बुजुर्ग दूध पचा नहीं पाते हैं और दूध पीते ही उन्हें डायरिया हो जाता है। इसलिए दूध की जगह उन्हें दही या पनीर देना चाहिए।
डॉ. पुनीत गुप्ता के मुताबिक सुबह-शाम की थोड़ी सी सैर बुजुर्गों के दिलों को लंबे समय जवान रख सकती है। ऐसे में अगर उनके बच्चे उनसे थोड़ा बातचीत करते रहें तो उनके ऊपर तनाव नहीं भारी पड़ेगा और वे परिवार के लिए एक अच्छे गार्जियन का काम कर सकेंगे।