फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fuel Prices India: महंगा तेल और सरकारी सख्ती से बदल रही तस्वीर, देश में घट सकती है पेट्रोल-डीजल की मांग

Mon, 25 May 2026 07:28 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और सरकारी ईंधन बचत अभियान के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की मांग घटने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने 2026 के लिए ईंधन मांग वृद्धि के अनुमान में 39 फीसदी कटौती की है। ईरान युद्ध के कारण डिलीवरी लागत भी 19 फीसदी बढ़ गई है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
विज्ञापन
देश में घट सकती है पेट्रोल-डीजल की मांग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और सरकारी ईंधन बचत अभियान के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की मांग घटने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने 2026 के लिए ईंधन मांग वृद्धि के अनुमान में 39 फीसदी कटौती की है। ईरान युद्ध के कारण डिलीवरी लागत भी 19 फीसदी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर आम लोगों के खर्च और बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है। 
विज्ञापन


आखिर क्यों घट सकती है पेट्रोल-डीजल की मांग?
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने भारत की 2026 के लिए रिफाइंड उत्पादों की मांग वृद्धि के अनुमान में बड़ी कटौती की है। कंपनी ने मांग वृद्धि का अनुमान 39 फीसदी घटाकर करीब 78 हजार बैरल प्रतिदिन कर दिया है। पहले यह अनुमान 1.28 लाख बैरल प्रतिदिन था। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की मांग वृद्धि का अनुमान भी 63 हजार बैरल प्रतिदिन से घटाकर 38 हजार बैरल प्रतिदिन कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार महंगे होते ईंधन और आर्थिक दबाव के कारण लोग गैर-जरूरी यात्राएं कम कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें- US-Iran Tensions: 'अगर मैं डील करूंगा, तो वह बेहतरीन होगी', ईरान के साथ समझौते पर बोले ट्रंप; ओबामा पर कसा तंज
विज्ञापन


किन कारणों से ईंधन खपत पर असर पड़ रहा है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्क फ्रॉम होम बढ़ने, गैर-जरूरी यात्राओं में कमी और सरकार के ईंधन बचत अभियान का सीधा असर डीजल और पेट्रोल की मांग पर पड़ेगा। डीजल की सालाना मांग में करीब 20 हजार बैरल प्रतिदिन की गिरावट आने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा विमान ईंधन यानी एटीएफ की मांग में भी करीब 50 फीसदी तक गिरावट का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हालात और महंगे तेल की वजह से लोग यात्रा खर्च कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या कीमतें अभी भी लागत से कम हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा बना हुआ है। सरकार ने हाल के दिनों में तीन बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन इसके बावजूद मौजूदा कीमतें तेल कंपनियों की अनुमानित लागत से कम बताई जा रही हैं। देश में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 103 रुपये प्रति लीटर है, जबकि लागत संतुलन के लिए इसे करीब 125 रुपये प्रति लीटर होना चाहिए। इसी तरह डीजल की मौजूदा औसत कीमत करीब 94 रुपये प्रति लीटर है, जबकि संतुलन स्तर 115 से 120 रुपये प्रति लीटर बताया जा रहा है।
विज्ञापन


ईरान युद्ध का डिलीवरी लागत पर कितना असर पड़ा?
ईरान युद्ध का असर अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र की डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी दिखाई देने लगा है। एक सर्वे के मुताबिक मार्च से मई के बीच भारत समेत एशिया क्षेत्र में डिलीवरी लागत में 19 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधन महंगा होने, ड्राइवरों के वेतन बढ़ने और शहरी भीड़भाड़ को इसकी बड़ी वजह बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें