घटनास्थल के पास रहने वाले चश्मदीद ने बताया, जब हादसा हुआ, तो वह घर पर थे। तेज धमाके की आवाज आई, तो बाहर आकर देखा कि एक ट्रेन का इंजन मालगाड़ी पर चढ़ा है। चीख-पुकार मची हुई थी। वह दौड़कर वहां पहुंचे और लोगों को बचाने में जुट गए। इस दौरान देखा कि दो-ढाई साल का मासूम अपनी मां के शव से चिपककर रो रहा था। पास में ही पिता का भी शव था। उन्होंने बताया, जब तक हम वहां पहुंचते, उससे पहले ही बच्चा रोते-रोते बेसुध होकर निढाल हो गया। देखा तो मासूम की नब्ज नहीं चल रही थी। संभवत: सदमे से उसकी जान चली गई। एक अन्य यात्री ने बताया, चारों तरफ खून से सने क्षत-विक्षत शव दिख रहे थे। हर तरफ से चिल्लाने, चीखने की आवाजें आ रही थीं।
पायलट ब्रेक न लगाता तो ज्यादा लोगों की जानें जा सकती थीं...
हादसे में सुरक्षित बचने के बाद चेन्नई पहुंचे यात्री नागेंद्रन ने बताया कि वे कोरोमंडल ट्रेन के एसी-3 टीयर के बी1 कोच में सवार थे। जब ट्रेन चालक ने अपने आगे मालगाड़ी को देखा, तो ट्रेन के ब्रेक लगाए। अगर ट्रेन सीधे मालगाड़ी से भिड़ती, तो शायद और भी ज्यादा भयावह हादसा होता। ज्यादा लोगों की जानें जातीं।
उन्होंने बताया कि हादसे में जनरल और स्लीपर के कोच सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। नागेंद्रन ने बताया, पहले झटके से ट्रेन रुकी और धमाके के साथ कई कोच पटरी से उतरे। लगा कि वे शायद बच नहीं पाएंगे। लेकिन, किस्मत अच्छी थी कि उन्हें चोट भी नहीं लगी।
हादसे में मृत सभी यात्री कोरोमंडल एक्सप्रेस के
अधिकारियों ने बताया, हादसे में मरने वाले सभी 288 यात्री कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन में सवार थे। बंगलूरू-हावड़ा सुपरफास्ट के किसी भी यात्री की मौत नहीं हुई। इस ट्रेन के 33 यात्रियों को मामूली चोटें आई और एक यात्री गंभीर घायल हुआ।
लोको पायलट और गार्ड भी घायल
कोरोमंडल के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड तथा बंगलूरू-हावड़ा एक्सप्रेस के गार्ड भी घायल हुए हैं।
रेलवे संरक्षा आयुक्त करेंगे जांच
रेल मंत्रालय ने दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस हादसे की जांच दक्षिण-पूर्वी प्रखंड के रेलवे संरक्षा आयुक्त एएम चौधरी करेंगे।
कोई नौकरी के लिए निकला तो कोई लौट रहा था अपने घर
हादसे की शिकार हुईं दोनों ट्रेनों में कोई नौकरी करने चेन्नई जा रहा था तो कोई हावड़ा अपने घर जा रहा था। शालीमार चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल सफर एक्सप्रेस ट्रेन ने 200 किमी से कुछ अधिक सफर तक किया होगा कि ये हादसे का शिकार हो गई। यह ट्रेन कोलकाता से दोपहर करीब साढ़े तीन बजे चली थी। इस ट्रेन को शनिवार शाम चेन्नई पहुंचना था।
चार राज्यों से गुजरने वाली ये ट्रेन पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर गुजरती है। ये ट्रेन 16 जगहों पर रुकती है। हादसे के वक्त ट्रेन भद्रक जा रही थी। वहीं, बंगलुरू-हावड़ा सफर एक्सप्रेस बृहस्पतिवार सुबह बंगलूरू से चली थी। इसे शुक्रवार रात हावड़ा पहुंचना था। यह ट्रेन 1962 किमी का सफर तय करती है।
ये ट्रेन कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है।ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे में पश्चिम बंगाल के कम से कम 35 यात्रियों की जान गई है और 544 घायल हुए हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया घायल चिकित्सा सहायता का जायजा लेने के लिए रविवार को एम्स भुवनेश्वर और कटक में मेडिकल कॉलेज का दौरा करेंगे।
आपदा से निपटना जानता है ओडिशा : गणेशी लाल
ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल ने घटनास्थल का दौरा कर कहा कि प्रदेश के लोग आपदाओं से बखूबी निपटते हैं। घायलों से मिलकर उन्होंने कहा कि वे किसी भी तरह की चिंता न करें, उनके पूर्ण स्वस्थ होने तक पूरा खयाल रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा और केंद्र सरकार अच्छे समन्वय के साथ इस हादसे से निपटने में जुटी हैं।
लाशों पर राजनीति न करें : दिनेश त्रिवेदी
पूर्व रेल मंत्री व भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी ने हादसे पर गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हुए कहा कि लाशों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, फिलहाल पीड़ित लोगों की जान बचाने पर सबको ध्यान देना चाहिए।