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Odisha: पूर्व मंत्री नबा दास के रसोइए की मौत की फिर से जांच करेगी ओडिशा पुलिस; पिता की अपील पर अधिकारी बदले गए

Sat, 15 Feb 2025 05:33 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झारसुगुड़ा

सार

ओडिशा में पूर्व मंत्री नबा दास के रसोइए की मौत का केस फिर से जांच के लिए खोला जाएगा। बता दें कि, 2022 में फांसी के फंदे पर लटके मिले ललित साहू की मौत को आत्महत्या करार दिया गया था। वहीं इस मामले में पिता की शिकायत पर जांच अधिकारी को बदल दिया गया है।
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पूर्व मंत्री नबा दास के रसोइया ललित साहू के परिजन - फोटो : ANI
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विस्तार
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ओडिशा पुलिस ने पूर्व मंत्री स्व. नबा दास के आवास पर रसोइए के रूप में काम करने वाले ललित साहू की मौत के मामले को फिर से खोलने का फैसला किया है। मामले में आईजी उत्तरी पुलिस रेंज (एनआर) संबलपुर, हिमांशु लाल ने कहा कि मामले को शुरू में आत्महत्या माना गया था, लेकिन मृतक के पिता बेलालसेन साहू के आरोपों के बाद इसकी फिर से जांच की जाएगी। आईजी हिमांशु लाल ने कहा कि मृतक ललित कुमार साहू के पिता ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा झारसुगुड़ा में पूर्व मंत्री स्वर्गीय नबा दास के आवास पर निजी सहायक और रसोइए के रूप में काम करता था।
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2022 में स्टाफ क्वार्टर में फांसी के फंदे पर लटका था मिला शव
बता दें कि, ललित साहू 17 अप्रैल, 2022 को शाम करीब 7:30 बजे नबा दास के आवास के पीछे स्टाफ क्वार्टर में लटका हुआ पाया गया था। उस समय, पुलिस ने कहा था कि ललित ने ऑनलाइन गेमिंग में लाखों रुपये हारने के बाद अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली थी। हालांकि, इस पूरे मामले में संदेह तब पैदा हुआ जब उसी रात उसके शव का जल्दबाजी में पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद शव को ढेंकनाल जिले में उसके पैतृक गांव भेज दिया गया।

दिसंबर 2022 में चोरी हो गया था विसरा
इस मामले में मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया विसरा दिसंबर 2022 में चोरी हो गया। विसरा चोरी होने से मामले में संभावित साजिश का संदेह पैदा हो गया है। इसके साथ ही, परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं दी गई। पिछले महीने मृतक के पिता बेलालसेन साहू ने अपने बेटे की मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए नए सिरे से जांच की मांग की थी। जिसके बाद पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू की है।
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पिता की शिकायत पर जांच अधिकारी बदले गए
आईजी हिमांशु लाल के अनुसार, एक इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी जांच अधिकारी (आईओ) के रूप में काम करेगा, जबकि एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मामले की निगरानी करेंगे। उन्होंने आगे बताया कि, 'शिकायत के आधार पर जांच अधिकारी को बदल दिया गया है। एक इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी जांच अधिकारी के रूप में काम करेगा और मैं, एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के साथ मामले की निगरानी करूंगा।' उन्होंने कहा, 'हम मामले की दोबारा जांच करेंगे और पूछताछ करेंगे। इसके अतिरिक्त, हम यह भी देखेंगे कि मामले में कोई गलती तो नहीं थी, उसे सुधारेंगे और मामले को आगे बढ़ाएंगे।'
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