सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी में होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को अनुमति दे दी है। पहले कोर्ट ने कोरोना वायरस संकट को देखते हुए इस साल रथ यात्रा पर रोक लगाने का फैसला किया था। कोर्ट के इस आदेश को बदलने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। कोर्ट के आदेश को बदले में प्रसिद्ध अधिवक्ता हरीश साल्वे की अहम भूमिका रही। वह ओडिशा सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए थे।
नीदरलैंड के द हेग की अतंरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान को चित करने वाले हरीश साल्वे ने जाधव की फांसी पर रोक लगाने में कामयाबी हासिल की थी। इस मुकदमे की सबसे खास बात यह रही थी कि साल्वे ने पाकिस्तान की जेल में कैद जाधव का केस लड़ने के लिए फीस के तौर पर महज एक रुपये लिया था। साल्वे के तर्कों के कारण ही आईसीजे ने 15-1 से भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा रथ यात्रा की अनुमति नहीं मिलने के फैसले पर फिर से विचार करने के लिए चार याचिकाएं डाली गई थीं। शीर्ष अदालत ने 18 जून को सुनवाई के दौरान कहा था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के हित को ध्यान में रखते हुए इस साल पुरी में रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि अगर हम इस साल रथ यात्रा आयोजित होने देते तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करते।