ओडिशा के मयूरभंज जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक सरकारी आदिवासी आवासीय स्कूल में दोपहर का भोजन करने के बाद 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। वहीं, अस्पताल में इलाज के दौरान पांचवीं कक्षा की एक छात्रा रूपाली बेसरा ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
कैसे शुरू हुआ मौत का खेल?
बताया जा रहा है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक ने निर्धारित मेन्यू को दरकिनार करते हुए बच्चों को अपनी मर्जी से खाना परोसा था। बच्चों के माता-पिता के अनुसार, उस दिन बच्चों को पखाला यानी बासी भात, आलू का चोखा और आम की चटनी दी गई थी। खाना खाने के कुछ ही घंटों बाद बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू कर दी।
देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या 100 के पार पहुंच गई। आनन-फानन में बच्चों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए 67 बच्चों को बारिपदा के पीएमआर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रशासन की कार्रवाई
मयूरभंज के जिला कलेक्टर हेमा कांत साय ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि लापरवाही बरतने के आरोप में स्कूल के प्रधानाध्यापक जयंत कुमार पाणिग्रही को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मृतक छात्रा के परिवार के लिए सात लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।
जिला अधिकारी ने मीडिया को बताया कि पुलिस जांच के साथ-साथ हम एक स्वतंत्र जांच भी कर रहे हैं। मेन्यू के बाहर का खाना क्यों परोसा गया, इसकी गहनता से पड़ताल की जाएगी। जो भी शिक्षक या अधिकारी इसमें दोषी पाए जाएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
छात्रा की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए। गुस्साए लोगों ने रासगोविंदपुर-जलेश्वर रोड को जाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो और पीड़ित परिवारों को उचित न्याय मिले। फिलहाल पुलिस ने मृतका की मां की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
अस्पताल में अभी क्या स्थिति है?
ताजा जानकारी के अनुसार, अभी भी 66 बच्चे मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन हैं, जबकि 41 बच्चों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। डॉक्टरों की विशेष टीमें स्कूल और अस्पताल दोनों जगह तैनात हैं ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके।