ओडिशा के केंदुझर जिले से आई एक हृदयविदारक तस्वीर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एक भाई को अपनी मृत बहन के पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल लेकर बैंक जाना पड़ा। अब इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन जागा है। पीड़ित जीतू मुंडा को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है और निजी स्तर पर भी बड़ी मदद पहुंच रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 27 अप्रैल की है। 50 वर्षीय जीतू मुंडा की 56 वर्षीय बहन कालरा मुंडा की मृत्यु जनवरी में हो गई थी। जीतू अपनी बहन के खाते में जमा राशि निकालने के लिए ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा के चक्कर काट रहा था। जीतू का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने उससे कहा कि पैसे तभी मिलेंगे जब वह अपनी बहन को हस्ताक्षर के लिए लेकर आएगा। मजबूर होकर जीतू ने अपनी बहन की कब्र खोदी और कंकाल को एक झोले में भरकर तीन किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया।
प्रशासन ने की कार्रवाई
मामला गहराते ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। राजस्व मंडल आयुक्त एसके महापात्रा ने जीतू के गांव दियानाली का दौरा किया। इसके कुछ ही घंटों के भीतर जीतू और उसके भाई के घर में बिजली कनेक्शन लगा दिया गया। उसे राशन कार्ड जारी किया गया है, जिसके तहत अब उसे हर महीने 35 किलो मुफ्त राशन मिलेगा। इतना ही नहीं, सरकार ने 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी के दस्तावेज तैयार करवा दिए। इसके बाद बैंक में जमा 19,402 रुपये जीतू को सौंप दिए गए। रेड क्रॉस फंड से भी उसे 30,000 रुपये की तत्काल सहायता दी गई है।
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जीतू मुंडा का बयान
जीतू मुंडा ने अपनी इस कार्रवाई पर कोई पछतावा नहीं जताया है। उसने बताया, 'मुझसे कहा गया था कि पैसे निकालने के लिए बहन को बैंक लाओ। जब मैंने कहा कि वह मर चुकी है, तब भी उन्होंने हस्ताक्षर के लिए उसे लाने की जिद की। इसलिए मैंने कब्र खोदी और कंकाल ले आया। अगर मैं ऐसा नहीं करता, तो वे हमें हमारे परिवार का पैसा नहीं देते। मैंने कुछ गलत नहीं किया है।'
निजी संस्थाओं ने बढ़ाए हाथ
इस घटना के बाद कई लोगों का दिल पसीजा। दिल्ली के एक कोचिंग संस्थान ने जीतू के नाम पर बैंक में 10 लाख रुपये जमा किए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने अपने वेतन से 50,000 रुपये की मदद भेजी है। और भी कई लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस बीच बैंक ने अपनी सफाई में कहा है कि यह घटना दावा निपटान प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण हुई। हालांकि, प्रारंभिक सरकारी जांच में बैंक कर्मियों की ओर से सहयोग न करने की बात सामने आई है।