Odisha Floods: ओडिशा में लगातार बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। तीन लोगों की मौत हो चुकी है और दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि हजारों लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए फिर भारी बारिश का अनुमान जताया है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि क्या इससे बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है?
ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बुधवार को भी गंभीर बनी रही। राज्य के छह उत्तरी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और दो लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस आपदा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ड्यूटी के दौरान करंट लगने से जान गंवाने वाला एक फायर सर्विस कर्मी भी शामिल है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद बताया कि सरकार राहत और बचाव कार्यों पर लगातार नजर रखे हुए है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी लोगों से घबराने की बजाय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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सुरेश पुजारी ने बताया कि तीनों मौतें क्योंझर जिले में हुई हैं, जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित जिले बालासोर, भद्रक और जाजपुर हैं। उन्होंने कहा कि क्योंझर में एक फायर सर्विस कर्मी चंदन पटनायक की ड्यूटी के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। इसके अलावा एक बुजुर्ग की दीवार गिरने से जान चली गई और एक बच्चे का शव बाढ़ के पानी में मिला। मंत्री ने बताया कि सबसे अधिक प्रभावित बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों से किसी व्यक्ति या पशु की मौत की सूचना नहीं मिली है। मुख्यमंत्री को इन मौतों की जानकारी दे दी गई है।
बाढ़ से सबसे ज्यादा कौन-कौन से इलाके प्रभावित हुए?
मंत्री ने बताया कि बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, संबलपुर और ढेंकानाल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
इसके अलावा क्योंझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा और गजपति जिलों में भी गहरे दबाव के कारण हुई भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति बनी है।
राज्य के 44 ब्लॉक के 266 गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ के कारण 761 मकानों को नुकसान पहुंचा है और 7,901 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।
हालात को देखते हुए 10 जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने का फैसला किया गया है।
राहत और बचाव के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?
जिला प्रशासन ने निचले इलाकों से करीब 30 हजार लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है, जहां उन्हें पका हुआ भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ओड्राफ) और फायर सर्विस की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं। फायर सर्विस के महानिदेशक सुधांशु सारंगी ने बताया कि पिछले 24 घंटे में उनकी टीमों ने बाढ़ प्रभावित गांवों से 212 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को बालासोर, भद्रक और जाजपुर में तैनात किया है।
क्या नदियों का बढ़ता जलस्तर नई चिंता बन गया?
सुरेश पुजारी ने बताया कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। दोपहर तक हीराकुंड जलाशय का जलस्तर 616 फुट दर्ज किया गया, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 630 फुट है। उन्होंने कहा कि 620 फुट तक पानी सुरक्षित रूप से रखा जा सकता है। यदि जलस्तर इससे ऊपर जाता है तो अतिरिक्त स्लूइस गेट खोलने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कटक के पास नाराज क्षेत्र में गुरुवार तक जलप्रवाह करीब नौ लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है। जल संसाधन विभाग के अनुसार क्षेत्र की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।