लोकसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, ऐसे में दलबदल का सिलसिला भी शुरू होना लाजमी है। इसी कड़ी में ओडिशा के कालाहांडी जिले से सत्तारूढ़ आदिवासी नेता और पांच बार पूर्व विधायक बलभद्र माझी ने अब बुधवार को बीजद को छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
पूर्व मंत्री माझी ने हाल ही में बीजद से इस्तीफा दे दिया था। वह पार्टी के ओडिशा प्रभारी अजॉय कुमार और प्रदेश अध्यक्ष शरत पटनायक की उपस्थिति में अपने समर्थकों के साथ एक सार्वजनिक रैली में कांग्रेस में शामिल हुए।
पूर्व विधायक ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद कहा, 'मैं एक आदिवासी नेता और बीजद का संस्थापक सदस्य हूं। हालांकि, मुझे बीजद में उचित सम्मान नहीं मिला, इसलिए मुझे पार्टी छोड़नी पड़ी। अब, मैं कांग्रेस के लिए काम करूंगा।'
पहली बार जनता दल के टिकट पर मिली थी जीत
माझी पहली बार 1990 में जनता दल के टिकट पर नारला से विधानसभा के लिए चुने गए थे। वह 1995 में नरला से और बाद में 2000, 2004 और 2014 में लांजीगढ़ सीट से दोबारा चुने गए। बीजद ने 2019 में उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया और लांजीगढ़ से प्रदीप कुमार दिसारी को मैदान में उतारा।
माझी ने 2002 और 2006 के बीच दो बार नवीन पटनायक सरकार में एससी, एसटी विकास मंत्री के रूप में कार्य किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे आशावादी हैं कि माझी के शामिल होने से लोकसभा चुनाव और राज्य में एक साथ होने वाले विधानसभा चुनावों में आदिवासियों के बीच उनकी संभावना बढ़ जाएगी। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी भक्त चरण दास ने कहा कि पार्टी में उनके जैसे मजबूत आदिवासी नेता की जरूरत है।
चरण दास ने आगे कहा, 'सभी महत्वपूर्ण ठेके उड़िया लोगों की अनदेखी करके बाहरी लोगों को सौंप दिए गए हैं। ओडिशा उड़िया लोगों का, उड़िया लोगों द्वारा और उड़िया लोगों के लिए होना चाहिए।'
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजद सरकार झूठे वादों और प्रचार से लोगों को धोखा दे रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में 'पीड़ित बीजद नेता और कार्यकर्ता' पार्टी छोड़ने के मौके का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, 'तमाम प्रचार और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल के बावजूद इस बार बीजद हारेगी और कांग्रेस राज्य में सत्ता में आएगी।'