ओडिशा के गजपति जिले रहने वाले निरंजन बेहरा नाम के एक नेत्रहीन व्यक्ति को 'विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी)' के रूप में चुना गया है। उन्हें तीन दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय पीडब्ल्यूडी दिवस पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
पारलाखेमुंडी नगरपालिका द्वारा प्रबंधित विद्यालय में पढ़ने के दौरान आठ वर्षीय बेहरा का एक सड़क दुर्घटना में आंखों की रोशनी चली गई। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बेहरा ने महेंद्रगिरि हाई स्कूल में कक्षा 10 तक पढ़ाई की, लेकिन अपने 100 प्रतिशत अंधापन के कारण मैट्रिक परीक्षा में सफल नहीं हो सके।
इसके बावजूद गरीबों के लिए काम करने के उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई। 2004 में, सेंटर फॉर कम्युनिटी डेवलपमेंट (सीसीडी) नामक एक स्थानीय स्वैच्छिक संगठन ने बेहेरा की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें सीसीडी में शामिल होकर विकलांगों के लिए काम करने के लिए उत्साहित किया।
बेहरा ने एसएबीएएल सेंटर ऑफ एक्शन बेंगलुरु द्वारा एनटीपीसी नोएडा में आयोजित एक राष्ट्रीय नेतृत्व शिविर में भाग लिया और विकलांगों के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए खुद को तैयार किया।
वह वर्ष 2010 में 'ओडिशा विकलांग मंच' के राज्य समन्वयक बने और वर्ष 2012 में इसके अध्यक्ष पद के लिए नामांकित हुए। उन्होंने ओडिशा में एक स्वतंत्र विकलांगता आयुक्त के कामकाज के लिए विधायी वकालत की। यह उनके प्रयास का ही नतीजा है कि हर आज ओडिशा सरकार हर माह राज्य के सभी विकलांगों को 10 किलो चावल देती है।
हाल ही में आए चक्रवाती तूफान तितली के दौरान बेहरा ने भी अपना घर खो दिया और अब एक पॉलिथीन की छत के नीचे रह रहे है।
उनकी उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देते हुए, गजपति के जिलाधिकारी अनुपम साहा ने कहा कि वह वास्तव में सभी विकलांगों के लिए एक प्रेरणा हैं। सरकार की योजना के तहत, उप्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के तहत निरंजन बेहरा को एक घर आवंटित किया जाएगा।