देबेंद्र शर्मा और बेटी डॉ. देबस्मिता शर्मा
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लोकसभा चुनाव के साथ ही कुछ राज्य ऐसे हैं जहां विधानसभा चुनाव भी होने हैं, जिनमें से एक है ओडिशा जो काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां एक पूर्व कांग्रेस विधायक ने अपनी बेटी के सपने पूरे करने के लिए अपनी पैतृक जमीन का हिस्सा बेच दिया। बता दें कि पूर्व एमएलए की बेटी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार है जिसके वित्तीय खर्च वहन करने के लिए उन्होंने यह कठोर फैसला लिया।
दरअसल, 2014 से 2019 तक केंद्रपाड़ा जिले के औल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले देबेंद्र शर्मा ने हाल ही में अपने पैतृक गांव में अपनी पांच डिसिमल वास की भूमि बेच दी। वित्तीय बाधाओं और विकट चुनौतियों का सामना करते हुए, शर्मा ने आयकर विभाग द्वारा पार्टी के खातों को फ्रीज करने का हवाला देते हुए कांग्रेस पार्टी से आर्थिक मदद की कमी पर चिंता व्यक्त की।
पूर्व विधायक ने कहा, 'मेरी बेटी डॉ. देबस्मिता शर्मा (28) उस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं, जहां से मैं और मेरे पिता पहले विधायक चुने गए थे। इसके साथ ही उन्होंने प्रचार खर्च के कारण परिवार पर पड़ने वाले वित्तीय तनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आवश्यक चुनाव खर्च को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इसलिए उन्हें मजबूरन जमीन का टुकड़ा बेचना पड़ा
देबास्मिता ने अपने पिता और दादा के नक्शेकदम पर चलते हुए सार्वजनिक सेवा में अपना करियर बनाने के लिए सरकारी डॉक्टर की नौकरी छोड़ दी। शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी के लिए पार्टी द्वारा प्रदान की गई प्रचार निधि अपर्याप्त थी। उन्होंने कहा, 'परिणामस्वरूप, विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए, मैंने अपने अभियान के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए गांव में अपनी पैतृक जमीन का एक टुकड़ा बेचने का कठिन निर्णय लिया।'
बता दें कि ओडिशा के मंत्री बीजद के प्रताप केशरी देब और भाजपा के कृष्ण चंद्र पांडा जैसे प्रमुख विरोधियों के खिलाफ खड़े होने के बावजूद, शर्मा को उम्मीद है कि मतदाता उनकी बेटी पर अपना भरोसा रखेंगे। हालांकि देबास्मिता अपने व्यस्त अभियान कार्यक्रम के कारण टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थीं