ओडिशा विधानसभा में गुरुवार को पोलावरम बांध परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके कारण विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। बता दें कि जैसे ही प्रश्नकाल की शुरुआत हुई, बीजद के विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और पोलावरम परियोजना पर चर्चा की मांग करने लगे। स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने जब बीजद के विधायकों का नोटिस खारिज कर दिया, तो विरोध और तेज हो गया। बीजद के सदस्य भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा ओडिशा के हितों की अनदेखी कर आंध्र प्रदेश में राजनीतिक लाभ ले रही है।
शोरगुल के बाद कार्यवाही की स्थगित
सदन में शोरगुल बढ़ने के बाद स्पीकर ने पहले कार्यवाही को एक घंटे के लिए स्थगित किया और फिर दोपहर 12:15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। बीजद के उपनेता प्रसन्ना आचार्य ने कहा कि पोलावरम परियोजना के पूरा होने से ओडिशा को गंभीर नुकसान होगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा इस परियोजना का एकतरफा निर्माण किए जाने पर चिंता जताई और इस पर चर्चा की मांग की।
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राज्य सरकार ने खारिज किया बीजद का नोटिस
साथ ही मामले में राज्य सरकार ने बीजद के नोटिस को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला अभी भी विचाराधीन है और इस पर चर्चा नहीं हो सकती। बीजद के वरिष्ठ विधायक अरुण कुमार साहू ने कहा कि पोलावरम परियोजना का डिजाइन एनडीए सरकार के दौरान बदला गया था और इस परियोजना को लेकर ओडिशा में गहरा संकट पैदा हो सकता है।
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स्पीकर के फैसले को मिला भाजपा का समर्थन
भाजपा के विधायक इराशीष आचार्य ने विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा न करने के स्पीकर के फैसले का समर्थन किया। साथ ही कहा कि नियमों के अनुसार विचाराधीन मामलों पर चर्चा नहीं की जा सकती। वहीं विपक्षी कांग्रेस के विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति के निलंबन के विरोध में विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए थे और काले बैज पहनकर विरोध प्रदर्शन किया।
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