भारत ने ओवरसीज सिटीजंस ऑफ इंडिया (ओसीआई) को मिले अधिकारों में बदलाव कर उन्हें विभिन्न मामलों में विदेशी नागरिक की श्रेणी में रखा है। नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जारी नई अधिसूचना के जरिये उन पर कई पाबंदियां भी लगाई गई हैं।
सरकार ने नए नोटिफिकेशन में धर्म, वित्त और पत्रकारिता जैसे मामलों में सीमित किए अधिकार, गृह मंत्रालय को दी ज्यादा शक्तियां
नई अधिसूचना अप्रैल 2005, जनवरी 2007 और जनवरी 2009 में जारी तीन अधिसूचनाओं की जगह ले लेगा। हाल के दिनों में इससे संबंधित मुकदमों में मिली हार के बाद सरकार यह कदम उठाया है। एक मामले में गृह मंत्रालय ने अमेरिकी-भारतीय डॉक्टर का ओसीआई दर्जा रद्द कर दिया था। वह बिहार में गरीबों को इलाज देते हुए धर्म प्रचार कर रहे थे।
हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉक्टर को इलाज करते हुए धर्म प्रचार की छूट दे दी थी, क्योंकि ओआईसी को ऐसा करने से रोकने का कोई कानून नहीं था। डॉक्टर को ओसीआई कार्ड भी वापस जारी करने के लिए कहा गया। एक अन्य मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ओसीआई विद्यार्थियों को विभिन्न कोर्स में एडमिशन के दौरान भारतीय नागरिक के समान समझने को कहा था।
प्रमुख बदलाव
1. मिशनरी-तब्लीगी आयोजन को अनुमति लेनी होगी
अब ओसीआई को देश में शोध कार्यों से लेकर मिशनरी या तब्लीगी आयोजनों के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी।
2. पत्रकारिता व संबंधित काम के लिए भी अनुमति
पत्रकारिता व इससे संबंधित गतिविधियों और विभिन्न निषेध, प्रतिबंधित व संरक्षित क्षेत्रों में जाने के लिए भी गृहमंत्रालय भी अनुमति लेनी होगी।
3. पत्रकारिता पर गृहमंत्रालय लेगा निर्णय
एक महत्वपूर्ण असर विदेशी संस्थानों को सेवा दे रहे ओसीआई पत्रकारों पर होगा। उन्हें भारत में काम करने के लिए गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
4. फेमा में भी अधिकार हुए सीमित
ओआईसी श्रेणी के लोगों को देश में आर्थिक, वित्तीय और शिक्षा के क्षेत्रों में फेमा के तहत होने वाली गतिविधियों के लिए विदेशी नागरिक माना गया है। 2003 में बने इस कानून में उन्हें अब तक एनआरआई की तरह अधिकार मिले हुए थे।
60 लाख ओसीआई, जानिए कौन हैं ये लोग?
विश्व में 2020 तक कुल 60 लाख लोगों को ओसीआई कार्ड हो चुके हैं। यह कार्ड ऐसे लोगों व उनके वैवाहिक साथी को दिए जाते हैं जो भारतीय मूल के हैं। इसमें पाकिस्तान व बांग्लादेश के नागरिक बने भारतीय मूल के लोग व उनकी अगली पीढ़ियां अपवाद हैं।
ओसीआई कार्ड धारक को भारत में अनिश्चित समय तक रहने व काम करने का मौका मिलता है। भारतीय नागरिकों की तरह कई अधिकार भी मिलते हैं। हालांकि भारत की नागरिकता नहीं मिलती, न वे वोट डाल सकते हैं और न सरकारी पद पा सकते हैं। सरकार जब चाहे ओसीआई कार्ड वापस ले सकती है।