वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) नेता प्रकाश अंबेडकर ने शनिवार को आरोप लगाया कि छगन भुजबल जैसे ओबीसी नेता मंडल आयोग आंदोलन के दौरान 'कमंडल' के पक्ष में थे और उन्होंने इसकी सिफारिशों का विरोध किया था।
यहां संविधान सम्मान रैली को संबोधित करते हुए बीआर अंबेडकर के पोते अंबेडकर ने कहा, 'भुजबल या प्रकाश शेंडगे जैसे मौजूदा ओबीसी नेताओं को मेरे रास्ते में नहीं आना चाहिए। आप मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की चल रही मांग का विरोध करते हुए कमंडल (1990 के दशक की हिंदुत्व राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द) के साथ थे।'
कमंडल का तात्पर्य हिंदुत्व की राजनीति से है जो 1980 के दशक में मंडल राजनीति के उसी दौर में उभरी थी। अम्बेडकर की टिप्पणियां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समूह के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जारंगे के नेतृत्व में मराठा समुदाय के विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आईं हैं। वरिष्ठ राकांपा नेता और कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल सहित अन्य ओबीसी नेताओं ने इस मांग का विरोध किया है।
जरांगे को सतर्क रहने की सलाह
वीबीए नेता ने जारांगे को बयान देते समय सतर्क रहने को कहा और सांप्रदायिक दंगों के बाद गुजरात विधानसभा चुनाव (2007 में) के प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा की गई एक विवादास्पद टिप्पणी का जिक्र किया।
अंबेडकर ने कहा, 'मेरे पास मनोज जारांगे के लिए कुछ सलाह है। हाल ही में उनके द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां उनके द्वारा अब तक जुटाई गई गति को संभावित रूप से खराब कर सकती हैं। किसी भी सलाहकार की बात न सुनें।'
अयोग्य लोगों के अधीन करना पड़ता है काम
जारांगे ने हाल ही में कहा था कि मराठों को अयोग्य लोगों के अधीन काम करना पड़ता है। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंबेडकर ने कहा कि हर साल करीब 20 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं।
उन्होंने कहा, मान लें कि एक छात्र को 40 लाख रुपये की जरूरत है, तो कल्पना करें कि कितना पैसा खर्च होगा। अगर हम यहां पर्याप्त शैक्षणिक संस्थान बनाते हैं तो छात्रों को फायदा होगा और कई लोगों को उन संस्थानों में नौकरियां मिलेंगी।