सीपीआई (एम) नेता प्रकाश करात ने भारत-अमेरिका के परमाणु समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा- 2008 में अमेरिका के साथ किए गए परमाणु समझौते ने भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया, लेकिन अब यह भारत के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को चीन का सहयोगी बनने की जरूरत नहीं है, लेकिन चीन के साथ अच्छे संबंध बनाना भारत के लिए फायदेमंद होगा।
अमेरिका के साथ समझौता और भारत की स्थिति
प्रकाश करात ने बताया कि 2008 में जब वामपंथी दलों ने परमाणु समझौते को लेकर यूपीए सरकार से समर्थन वापस लिया था, तब इसे सिर्फ एक परमाणु समझौते के रूप में देखा गया था। लेकिन यह एक बड़े रणनीतिक गठबंधन की शुरुआत थी, जिसने भारत को अमेरिका के साथ गहरे रिश्तों में बांध दिया। उन्होंने कहा, 'अमेरिका ने हमें परमाणु समझौता दिया और उन सभी प्रतिबंधों को हटा दिया, जो पहले लगे हुए थे। लेकिन इसके बदले में हमें अमेरिका के साथ सैन्य और रक्षा समझौतों में बंधना पड़ा।'
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भारत से क्या चाहता है अमेरिका?
सीपीआईएम नेता ने कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत से कई तरह के समझौते करवाना चाहता है। जिसमें पहला ये है कि अमेरिका चाहता है कि भारत उससे ज्यादा हथियार खरीदे। दूसरा ये कि भारत को अमेरिका से 10 अरब डॉलर का तेल और गैस खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एफ-35ए लड़ाकू विमान, जिसे अमेरिका भारत को देना चाहता है, वह भारत के लिए उपयुक्त नहीं है। यह बहुत महंगा और अव्यावहारिक है, लेकिन भारत इसे मना कर पाएगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
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चीन के साथ रिश्ते सुधारने की जरूरत
प्रकाश करात ने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए और एक बहुध्रुवीय दुनिया में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें चीन का सहयोगी बनने की जरूरत नहीं है, लेकिन उससे अच्छे संबंध रखने से हमारे लिए कूटनीतिक फैसले लेना आसान होगा।'
थरूर के CPIM में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज
कांग्रेस में शशि थरूर के भविष्य पर सवाल उठने के कुछ दिनों बाद, सीपीआई(एम) के अंतरिम समन्वयक प्रकाश करात ने गुरुवार को उनके वामपंथी दल में शामिल होने की संभावना को खारिज कर दिया और कहा कि तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कभी यह संकेत नहीं दिया कि वह इस महान पुरानी पार्टी को छोड़ देंगे। प्रकाश करात ने शशि थरूर की प्रशंसा की और कहा कि वह सामान्य राजनीतिज्ञ नहीं हैं और उनके विचार कभी-कभी कांग्रेस के लिए असुविधाजनक हो सकते हैं। वहीं अटकलबाजी के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि शशि थरूर ने किसी भी तरह से संकेत दिया था कि वह कांग्रेस को छोड़ने जा रहे हैं।'