गांवों में ही स्वरोजगार की संभावनाएं ढूंढ रहे युवाओं के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी की ओर से सुनहरा मौका आया है। कंपनी ने देशभर में फैले अपने 21 प्लांटों के लिए पराली, गेहूं के डंठल या अन्य कृषि अवशेषों का पैलेट बनाकर आपूर्ति करने को आवेदन मंगाया है। इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 जनवरी, 2019 है। आवेदन पत्र एनटीपीसी टेंडर डॉट कॉम पर उपलब्ध है।
एनटीपीसी के एक वरिष्ठ आधिकारी का कहना है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से मिले निर्देश के आधार पर पिछले वर्ष से ही बिजली घर की भट्ठी में कोयले के साथ पराली को मिलाकर जलाने का काम शुरू हुआ था। कोयले के साथ पराली बेहतर तरीके से जल सके और उससे पर्याप्त मात्रा में गर्मी मिले, इसके लिए पराली या अन्य कृषि अवशेषों का पैलेट बनाना जरूरी है।
चार साल तक आपूर्ति का अवसर
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि पैलेट बनाने के लिए गांव में ही एक छोटा प्लांट लगाने की जरूरत है। इसके लिए कुछ निवेश की आवश्यकता होगी। साथ ही इसके लिए आवेदन करते समय आवेदन पत्र के साथ एक लाख रुपये की सुरक्षा राशि भी जमा करनी होगी। इस राशि के निवेश के बाद संबंधित व्यक्ति को पर्याप्त काम और रिटर्न मिल सके, इसलिए पैलेट बनाकर आपूर्ति करने की समय-सीमा चार साल तक तय की गई है।
दादरी प्लांट में हो रहा परीक्षण
एनटीसपी के दादरी प्लांट में कोयले के साथ पैलेट मिलाकर जलाने का परीक्षण शुरू हो चुका है, जिसे तकनीक भाषा में बायोमास फायरिंग कहते हैं। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक मिला है। सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत कंपनी के सभी 21 प्लांटों में बायोमास फायरिंग होनी है।
करीब 4,000 करोड़ का बाजार
सूत्रों के मुताबिक, एनटीपीसी के सभी प्लांटों में पैलेट की दैनिक खपत करीब 20,000 टन होगी। पराली से बने एक टन पैलेट के लिए 5,500 रुपये मिलते हैं। इस हिसाब से सालाना यह करीब 4,000 करोड़ रुपये का बाजार बन सकता है। एनटीपीसी की यह पहल पर्यावरण के लिए भी अच्छा है।