पूर्व समूह संचालन अधिकारी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के पूर्व एमडी के पूर्व सलाहकार सुब्रमण्यम को इस महीने फरवरी में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने आनंद की दूसरी जमानत याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है। अदालत ने सीबीआई को 26 अप्रैल तक अपना पक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने एनएसई को-लोकेशन मामले में आनंद सुब्रमण्यम की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 24 मार्च को इसी अदालत ने मामले में आनंद सुब्रमण्यम की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
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पूर्व समूह संचालन अधिकारी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के पूर्व एमडी के पूर्व सलाहकार सुब्रमण्यम को इस महीने फरवरी में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। विशेष सीबीआई न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने आनंद की दूसरी जमानत याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है। अदालत ने सीबीआई को 26 अप्रैल तक अपना पक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
सुब्रमण्यम की पहली जमानत याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा था कि जांच के इस चरण में अभियोजन पक्ष अलग-अलग बिखरे बिंदुओं पर काम कर रहा है। आरोपपत्र दायर किया जाना है। जांच प्रारंभिक चरण में है और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद ही ठोस जानकारी सामने आएगी। ऐसे में वर्तमान में जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
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सुब्रमण्यम की ओर से पेश अधिवक्ता अर्शदीप सिंह खुराना ने तर्क रखा कि प्राथमिकी में निहित आरोपों का संबंध है। उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया है क्योंकि वह किसी भी तरह से लगाए गए आरोपों से जुड़ा नहीं है।
प्राथमिकी एक संजय गुप्ता और उनकी कंपनी ओपीजी सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड को को-लोकेशन सुविधाओं तक अनुचित पहुंच में आवेदक की कथित भूमिका से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि संजय गुप्ता ने अज्ञात व्यक्तियों की मदद से डेटा सेंटर के कर्मचारियों का प्रबंधन किया।
सीबीआई के वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि 832 जीबी डाटा बरामद किया गया है। हमने इसे संग्रह से पुनर्प्राप्त कर लिया है। हमने हमें पूरा डेटा देने के लिए माइक्रोसॉफ्ट को लिखा है। आरोपी हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहा था। आनंद बहुत प्रभावशाली है और इस बात की पूरी संभावना है कि वह भाग सकता है ।
सीबीआई की जांच के मुताबिक समूह संचालन अधिकारी आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति तत्कालीन एनएसई की अध्यक्ष और एमडी चित्रा रामकृष्णन से प्रभावित थी। सीबीआई मार्केट एक्सचेंजों के कंप्यूटर सर्वर से शेयर दलालों तक सूचना के कथित अनुचित प्रसार की जांच कर रही है।