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UK Court: यूके की अदालत में NRI महिला की जंग, बीमारी के बावजूद लड़ रही बराबरी के हक की लड़ाई

Thu, 18 Dec 2025 11:29 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

NRI Woman UK Court Case:  यूके में रहने वाली एनआरआई महिला संजु पाल छह साल से कार्यस्थल पर बराबरी और इंसाफ के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। एंडोमेट्रियोसिस बीमारी से पीड़ित संजु को पदोन्नति न मिलने पर नौकरी से निकाल दिया गया था। अब यह मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है।
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यूके की अदालत में एनआरआई महिला की जंग - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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यूके की एक अदालत में एक एनआरआई महिला पिछले छह साल से अपने कार्यस्थल पर इंसाफ और बराबरी के अधिकार के लिए लड़ रही है। यह मामला सिर्फ एक नौकरी से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि उन लाखों महिलाओं की आवाज है, जो गंभीर बीमारी के बावजूद काम करती हैं और कॉरपोरेट सिस्टम की कठोर नीतियों का शिकार होती हैं। पश्चिम बंगाल की संजु पाल की यह लड़ाई अब हाईकोर्ट अपील ट्रिब्यूनल तक पहुंच चुकी है।

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लंदन में चल रहे इस मामले में संजु पाल ने यूके के समानता कानून 2010 और रोजगार अधिकार अधिनियम 1996 के तहत अपने अधिकारों की मांग की है। संजु पाल एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी के कारण उन्हें कार्यस्थल पर भेदभाव झेलना पड़ा और अप या आउट जैसी कॉरपोरेट नीति के तहत उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया।

बीमारी और भेदभाव का मुद्दा
एंडोमेट्रियोसिस एक पुरानी बीमारी है, जिससे यूके में करीब 15 लाख महिलाएं प्रभावित बताई जाती हैं। इस बीमारी में तेज दर्द और शारीरिक कमजोरी होती है। संजु पाल का कहना है कि नौकरी से निकाले जाने से पहले वह इसी बीमारी से जूझ रही थीं। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने पहले यह मानने से इनकार कर दिया कि यह बीमारी कानूनी रूप से विकलांगता की श्रेणी में आती है। अब इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
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नौकरी से निकाले जाने का विवाद
यह मामला वर्ष 2019 का है, जब संजु पाल को एक कंसल्टिंग कंपनी में सीनियर मैनेजर पद पर पदोन्नति नहीं मिलने के बाद कथित खराब प्रदर्शन के आधार पर नौकरी से हटा दिया गया। कंपनी की नीति के अनुसार यदि कोई कर्मचारी तय समय में अगली पोस्ट के लिए तैयार नहीं माना जाता, तो उसे बाहर किया जा सकता है। संजु पाल का तर्क है कि कानून मौजूदा पद पर कामकाज के आधार पर ही आकलन की अनुमति देता है, न कि भविष्य की भूमिका के आधार पर।

कोर्ट की सुनवाई और अपील
रोजगार ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2022 में संजु पाल के पक्ष में आंशिक फैसला सुनाया और उन्हें अनुचित बर्खास्तगी के लिए मुआवजा दिया। हालांकि, विकलांगता से जुड़े दावे को खारिज कर दिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट अपील की अनुमति मिली। दिसंबर में सुनवाई पूरी हो चुकी है और आने वाले हफ्तों में फैसला आने की उम्मीद है। संजु पाल ने इस लड़ाई के लिए ऑनलाइन अभियान के जरिए आर्थिक मदद भी जुटाई।
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व्यापक असर और उम्मीद
संजु पाल का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं है। अगर फैसला उनके पक्ष में आता है, तो इससे कंसल्टिंग सेक्टर और दूसरे कॉरपोरेट क्षेत्रों में काम करने वाली बीमार महिलाओं को मजबूती मिलेगी। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यस्थल पर गैरकानूनी और अमानवीय नीतियां खत्म हों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहें।

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