एनपीआर पर बैठक के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि इसके जरिए देश के नागरिकों का एक विस्तृत डाटा बेस तैयार किया जाएगा। इसमें जन सांख्यिकी और बायोमीट्रिक दोनों तरह के आंकड़े जमा होंगे। अधिकतर राज्यों ने एनपीआर के प्रावधानों पर नोटिफिकेशन जारी किया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 3941.35 करोड़ ऱपये का बजट स्वीकृत किया है।
जानकारियों के दस्तावेज नहीं जांचे जाएंगे
सूत्रों के अनुसार लोगों से ली जा रही जानकारियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच नहीं की जाएगी। लेकिन आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस होने पर इनकी जानकारी ली जाएगी। एनपीआर व जनगणना में क्षेत्रीय शिक्षकों को लगाया जाएगा, जिन्हें अधिकतम 25 हजार रुपये का भुगतान होगा।
केंद्र सरकार मकान सूचीकरण के जरिए देशवासियों से जुड़ी 31 प्रकार की जानकारियां जमा करेगी। इसके लिए सभी जनगणना अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्रों में लोगों के घरों पर जाकर सवाल पूछें और जानकारियां दर्ज करें। इनमें मकान नंबर, जनगणना मकान नंबर, मकान के फर्श, दीवार और छत में उपयोग सामग्री, मकान के उपयोग और हालत की जानकारी ली जाएगी। परिवार क्रमांक, सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, आरक्षित वर्ग की जानकारी, मकान के मालिकाना हक की जानकारी, कमरों की संख्या, परिवार में विवाहित दंपति की संख्या, पेयजल स्रोत, पेयजल उपलब्धता, प्रकाश का स्रोत, शौचालय की सुलभता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी, बाथरूम की उपलब्धता, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन जैसी जानकारियां भी ली जाएंगी। घर में खाना पकाने में उपयोग हो रहे ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, लैपटॉप/कंप्यूटर, टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन, साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड, कार/जीप/वैन और परिवार द्वारा उपयोग हो रहा मुख्य अनाज व मोबाइल फोन नंबर भी दर्ज होंगे।