बैंकों के 9000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाए बिना फरार हुए विवादास्पद कारोबारी विजय माल्या की मुश्किलों का दौर शुरू हो गया है। वेस्टमिंस्टर कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई को प्रत्यर्पण की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। चूंकि इस मामले में आरोपी को ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट तक में अपील का अधिकार है।
ऐसे में इस मामले के लंबा खिंचने के भी आसार हैं। हालांकि सरकार मान रही है कि ब्रिटेन सरकार का रुख सकारात्मक है। ऐसे में देर सबेर माल्या पर प्रत्यर्पण कानून का शिकंजा हर हाल में कसेगा। वैसे भी भारत ने माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में ब्रिटेन पर लगातार दबाव बनाया हुआ है।
भले ही गिरफ्तारी के बाद माल्या को तत्काल जमानत मिल गई हो, मगर वारंट जारी होते ही उनके लिए मुसीबतों का दौर शुरू हो गया है। अब इस मामले में माल्या को सुनवाई के दौर से गुजरना होगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक चूंकि माल्या के खिलाफ अकाट्य सबूत हैं।
ऐसे में भारत की प्रत्यर्पण की मांग को खारिज करना आसान नहीं है। हां, यह अलग बात है कि ऐसे मामलों में आरोपी के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार होने केकारण प्रत्यर्पण का मामला लंबा खिंच सकता है।
क्या है प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक, किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए पहले संबंधित देश को अनुरोध करना पड़ता है। ब्रिटेन में इस आशय का अनुरोध हासिल होने पर प्रत्यर्पण पर पहले वहां के विदेश मंत्रालय को हामी भरनी होती है।
इसके बाद विदेश मंत्रालय प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मामले को स्थानीय कोर्ट में भेजती है। वह इस मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी कर आरोपी का पक्ष जानता है। उसके बाद इस मामले में नियमित सुनवाई के बाद कोर्ट फैसला लेता है। स्थानीय कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होने के बाद दोनों ही पक्षों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है।