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अब उन पर हमला करना चाहिए, जिनकी प्रवृत्ति हमलावर: भागवत

Mon, 22 Jan 2018 12:36 AM IST
एजेंसी, गुवाहाटी
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मोहन भागवत - फोटो : self
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी हर दुश्मनी को भुला दिया लेकिन हमारे पड़ोसी देश के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, अपनी परोपकारी प्रकृति के बावजूद भारत हजारों वर्षों से ‘संघर्ष’ कर रहा है। अब उसे अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ना चाहिए। उन लोगों पर आक्रमण करना होगा, ‘जिनकी प्रवृत्ति हमला करने की रही है।’
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पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले वह संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। संघ प्रमुख ने कहा, संघर्ष के बाद पाकिस्तान का जन्म हुआ। ‘भारतवर्ष’ 15 अगस्त 1947 के बाद पाकिस्तान के साथ अपनी दुश्मनी को भूल गया। पाक इसे अभी तक नहीं भूला है। यही हिंदू स्वभाव और दूसरे स्वभाव में अंतर है। 

उन्होंने कहा, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा जैसी प्राचीन सभ्यताएं और हमारी संस्कृति के विकास स्थल, आज पाकिस्तान में हैं। पाक ने तब क्यों नहीं कहा कि भारत से जुड़ी हुई हर चीज यहां है और तुम कोई दूसरा नाम रख लो।  उन्होंने ये सब नहीं कहा। वह भारत के नाम से अलग होना चाहते थे, क्योंकि वह जानते थे कि भारत के नाम के साथ हिंदुत्व आएगा। जहां हिंदुत्व होगा, वही भारत होगा। 
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विविधता के बावजूद भारत हिंदुत्व के कारण एक है

मोहन भागवत - फोटो : SELF
संघ प्रमुख ने कहा कि विविधता के बावजूद भारत हिंदुत्व के कारण एक है। हमारी आंतरिक एकता हिंदुत्व पर आधारित है और इसीलिए भारत एक हिंदू राष्ट्र है। भागवत ने कहा, भारत ने दुनिया को मानवता का संदेश दिया है। दूसरे बात करते हैं लेकिन वैसा व्यवहार नहीं करते। भारत ने अपने व्यवहार से दूसरों को सीख दी है। दुनिया भारतवर्ष की इस प्रकृति को हिंदुत्व का नाम देती है। इसी वजह से भारतवर्ष के लोग हिंदू कहे जाते हैं। 

उन्होंने कहा, अगर भारत के लोग हिंदुत्व की भावना को भूल जाएंगे तब उनके दूसरे देशों से संबंध भी खत्म हो जाएंगे। भागवत ने कहा कि बांग्लादेश के गठन के समय वह तमाम समानताओं के बावजूद भारत में शामिल नहीं हुआ। इसका कारण हिंदू भावनाओं की कमी था। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के अलग होने के बाद बंगाली भाषी बांग्लादेश भारत के साथ क्यों नहीं मिला? क्योंकि उनमें हिंदू भावनाएं नहीं थीं। अगर हिंदू भावनाओं को भुलाया जाता है तो भारत टूटता है।  
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