भारतीय रेलवे ने सफर को ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी यात्रियों को वंदे भारत ट्रेनों जैसी सुविधाओं का अनुभव मिलेगा। रेलवे ने ट्रेनों में लगने वाले झटकों को कम करने के लिए नई तकनीक अपनाने की योजना बनाई है। इसके तहत ट्रैक सिस्टम में बदलाव किए जाएंगे, ताकि यात्रा पहले से ज्यादा आरामदायक हो सके।
रेल मंत्रालय के अनुसार, ट्रेनों में सबसे ज्यादा झटके पॉइंट्स और क्रॉसिंग के दौरान लगते हैं, जहां ट्रैक बदलते हैं। इसके अलावा ब्रिज एप्रोच पर भी झटकों की समस्या रहती है। अब इन झटकों को कम करने के लिए अब पारंपरिक लोहे और कंक्रीट के स्लीपरों की जगह कम्पोजिट स्लीपर लगाए जाएंगे। ये स्लीपर खास कुशनिंग तकनीक से लैस होंगे। जिससे ट्रेन गुजरते समय झटकों का असर काफी हद तक कम हो जाएगा।
नई तकनीक वाले ये स्लीपर हल्के होने के बावजूद काफी मजबूत हैं। ये प्रति वर्ग सेंटीमीटर करीब 700 किलोग्राम तक भार सहन कर सकते हैं, जिससे इनकी टिकाऊ क्षमता बढ़ जाती है। इनकी डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि जरूरत और जगह के हिसाब से इन्हें आसानी से ढाला जा सके। इससे ट्रैक बिछाने का काम भी आसान होगा। इन स्लीपरों के इस्तेमाल से यात्रा अधिक आरामदायक बनेगी और रखरखाव व मरम्मत का काम भी पहले की तुलना में सरल हो जाएगा।
रेलवे के मुताबिक, कम्पोजिट स्लीपर के इस्तेमाल से रखरखाव की लागत कम होगी। इनकी उम्र पारंपरिक स्लीपरों से ज्यादा होगी। अभी वंदे भारत एक्सप्रेस में झटके काफी कम महसूस होते हैं। क्योंकि इनमें उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अब ट्रैक में नई तकनीक लागू होने के बाद सामान्य पैसेंजर ट्रेनों में भी झटके कम होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही रेलवे ट्रैक की निगरानी व्यवस्था को भी और आधुनिक बना रहा है। अब एआई तकनीक के जरिए पटरियों की जांच की जाएगी, जिससे समय रहते खामियों का पता लगाया जा सकेगा। निरीक्षण गाड़ियों में ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार से लैस खास डिवाइस लगाए जाएंगे। जो पटरियों के नीचे की स्थिति का विश्लेषण करेंगे। इसके अलावा रेल पटरियों की वेल्डिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे छोटी-छोटी दरारों और खामियों का भी आसानी से पता चल सकेगा।