फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब मरीजों को घेर रहा स्ट्रोक और अवसाद, देश के वैज्ञानिक और मनोरोग विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Sat, 27 Jun 2020 05:33 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।
विज्ञापन
जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
विज्ञापन

कोरोना वायरस इंसानी शरीर में कई तरह के प्रभाव छोड़ रहा है। कई चिकित्सकीय अध्ययनों में साबित हो चुका है कि कोरोना होने के बाद जवान व बुजुर्ग मरीजों में स्ट्रोक, अवसाद और चिंता जैसी मानसिक परेशानियां देखने को मिल रही हैं।

विज्ञापन


इसलिए देश के वैज्ञानिक और मनोरोग विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए मरीजों के लिए काउंसलिंग को अनिवार्य बताया है। साथ ही कहा है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मरीज की घर में भी निगरानी बेहद जरूरी है। 

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार यूरोप के अस्पतालों में भर्ती 153 मरीजों पर मानसिक तनाव को लेकर पता चला है कि यह संक्रमण लोगों को मस्तिष्क से जुड़े विकार को बढ़ावा दे रहा है। 125 में से 77 मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक की परेशानी मिली है।
विज्ञापन


वायरस शरीर में ब्लड क्लॉट बनाता है जिसकी वजह से मरीजों को स्ट्रोक की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, 39 मरीजों में मानसिक तनाव देखने को मिला है। 23 मरीजों में संक्रमण से पहले किसी भी तरह की मनोरोग परेशानी नहीं थी, लेकिन इलाज के दौरान उन्हें यह दिक्कत होने लगी है।

नई दिल्ली स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आरपी बेनीवाल का कहना है कि जवान और बुजुर्ग मरीजों में ऐसी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं। कोरोना को लेकर भय, उपचार और एक तनाव ग्रस्त माहौल हो सकता है।

इसलिए कोविड उपचार में मरीजों के लिए काउंसलिंग होना बेहद जरूरी है। दिल्ली एम्स के डॉ. नंद किशोर बताते हैं कि कोरोना वायरस के कई प्रभाव मरीजों में देखने को मिल रहे हैं। हालांकि ज्यादातर मरीजों में गंभीर हालात नहीं हैं। अगर समय रहते इन्हें काउंसलिंग मिल जाए तो यह स्वस्थ्य हो सकते हैं।

गंभीर मरीजों में परेशानियां अधिक...

ब्रिटेन की लिवरपूल यूनिवर्सिटी के डॉ. बेनेडिक्ट माइकल के मुताबिक, गंभीर मरीजों में उपचार के बाद मानसिक परेशानियां देखने को मिल रही हैं। हालांकि कोरोना के प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने के लिए अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।

हर देश में कोरोना वायरस का स्ट्रेन और उसके प्रभाव अलग हैं। भारत में भी अब तक कई स्ट्रेन मिल चुके हैं। ऐसे में कौन से स्ट्रेन का प्रभाव कितने समय तक शरीर के किस-किस भाग को नुकसान दे सकता है? इस पर अध्ययन जरूरी है। 

स्वस्थ मरीज की भी बेहतर निगरानी हो
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) की प्रो. प्राची यादव का कहना है कि कोरोना को लेकर बहुत कुछ जानना बाकी है। राहत है कि देश में तेजी से मरीजों की रिकवरी हो रही है लेकिन कोविड काल के बाद मरीजों पर असर के अध्ययन की जरूरत है। उनका मानना है, मरीजों की घर पर बेहतर निगरानी की जा सकती है। परिवार को अलर्ट रहकर मरीज की दिनचर्या पर ध्यान रखना चाहिए। छोटी सी छोटी परेशानी को भी नजरदांज नहीं करना चाहिए। 

कर्नाटक में संक्रमित महिला ने दी जान

कर्नाटक के बंगलूरू में 60 वर्षीय महिला ने अस्पताल के बाथरूम में फांसी लगाकर जान दे दी। महिला को कोरोना था और वह केसी जनरल अस्पताल में भर्ती थी। पुलिस के मुताबिक, महिला को 18 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बृहस्पतिवार रात करीब दो बजे वह बाथरूम गई थी, लेकिन लौटी नहीं। जब महिला की बहू ने उसे ढूंढा तो उसका शव फंदे से लटका मिला। मामले की जांच चल रही है। 

राजस्थान में 91 नए केस, एक मौत 
राजस्थान में शुक्रवार को कोरोना के 91 नए मामले मिले, वहीं जोधपुर में एक की मौत हो गई। राज्य में कुल संक्रमित 16,387 हैं। कोटा में 23, भरतपुर में 17, करौली में 13, जयपुर में 15, झुंझुनू में सात, पाली व सिरोही में पांच-पांच, दौसा में चार और अजमेर-बूंदी में एक-एक केस मिला।
विज्ञापन

ओडिशा में छह हजार के पार मरीज 

ओडिशा में कोरोना के मामले छह हजार के पार पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को 218 नए मामलों की पुष्टि की, इनमें सात एनडीआरएफ के जवान भी शामिल हैं। राज्य में कुल मरीज 6180 हैं। ज्यादातर मामले विभिन्न क्वारंटीन सेंटरों से मिल रहे हैं, जहां प्रवासी श्रमिकों को रखा गया है। वहीं, एनडीआरएफ के जवान पश्चिम बंगाल से हाल ही में लौटे थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें