ब्रिटेन की लिवरपूल यूनिवर्सिटी के डॉ. बेनेडिक्ट माइकल के मुताबिक, गंभीर मरीजों में उपचार के बाद मानसिक परेशानियां देखने को मिल रही हैं। हालांकि कोरोना के प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने के लिए अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।
हर देश में कोरोना वायरस का स्ट्रेन और उसके प्रभाव अलग हैं। भारत में भी अब तक कई स्ट्रेन मिल चुके हैं। ऐसे में कौन से स्ट्रेन का प्रभाव कितने समय तक शरीर के किस-किस भाग को नुकसान दे सकता है? इस पर अध्ययन जरूरी है।
स्वस्थ मरीज की भी बेहतर निगरानी हो
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) की प्रो. प्राची यादव का कहना है कि कोरोना को लेकर बहुत कुछ जानना बाकी है। राहत है कि देश में तेजी से मरीजों की रिकवरी हो रही है लेकिन कोविड काल के बाद मरीजों पर असर के अध्ययन की जरूरत है। उनका मानना है, मरीजों की घर पर बेहतर निगरानी की जा सकती है। परिवार को अलर्ट रहकर मरीज की दिनचर्या पर ध्यान रखना चाहिए। छोटी सी छोटी परेशानी को भी नजरदांज नहीं करना चाहिए।
कर्नाटक के बंगलूरू में 60 वर्षीय महिला ने अस्पताल के बाथरूम में फांसी लगाकर जान दे दी। महिला को कोरोना था और वह केसी जनरल अस्पताल में भर्ती थी। पुलिस के मुताबिक, महिला को 18 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बृहस्पतिवार रात करीब दो बजे वह बाथरूम गई थी, लेकिन लौटी नहीं। जब महिला की बहू ने उसे ढूंढा तो उसका शव फंदे से लटका मिला। मामले की जांच चल रही है।
राजस्थान में 91 नए केस, एक मौत
राजस्थान में शुक्रवार को कोरोना के 91 नए मामले मिले, वहीं जोधपुर में एक की मौत हो गई। राज्य में कुल संक्रमित 16,387 हैं। कोटा में 23, भरतपुर में 17, करौली में 13, जयपुर में 15, झुंझुनू में सात, पाली व सिरोही में पांच-पांच, दौसा में चार और अजमेर-बूंदी में एक-एक केस मिला।
ओडिशा में कोरोना के मामले छह हजार के पार पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को 218 नए मामलों की पुष्टि की, इनमें सात एनडीआरएफ के जवान भी शामिल हैं। राज्य में कुल मरीज 6180 हैं। ज्यादातर मामले विभिन्न क्वारंटीन सेंटरों से मिल रहे हैं, जहां प्रवासी श्रमिकों को रखा गया है। वहीं, एनडीआरएफ के जवान पश्चिम बंगाल से हाल ही में लौटे थे।