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कॉलेज में जूनियर को घूरना, दोस्ती करना भी मानी जाएगी रैगिंग

Wed, 22 Mar 2017 03:00 PM IST
amamrujala.com-Written By: सीमा शर्मा
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कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाली लड़की या लड़के को जातिसूचक या किसी विशेष प्रांत के नाम से पुकारना ही रैगिंग नहीं है, बल्कि उन्हें घूरना या मस्ती में दोस्ती का प्रस्ताव देकर मजाक उड़ाना भी रैगिंग की श्रेणी में शामिल हो गया है।
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कैंपस में नए छात्र या छात्रा की पढ़ाई बाधित करना या कैंपस में रहने के दौरान परेशान करना भी अब कानूनी जुर्म होगा। केंद्र सरकार ने नए सत्र से पहले देशभर के विश्वविद्यालयों समेत राज्यों को रैगिंग से निपटने के इंतजाम करने का निर्देश दिया है। यदि किसी छात्र से रैगिंग होती है तो संस्थान के साथ-साथ उक्त राज्य को भी जवाब देना पड़ेगा।

केंद्र सरकार हुई सख्त

रैगिंग पर सख्त यूजीसी
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथ आजादी के साथ स्वस्थ माहौल में पढ़ाई करवाना चाहती है। हालांकि दूरदराज या ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के साथ सीनियर मस्ती के नाम पर भेदभाव व आपत्तिजनक व्यवहार करते हैं, जिसके चलते कई छात्र अपनी जिंदगी तक समाप्त कर रहे हैं। केरल समेत नोएडा कैंपस में रैगिंग के चलते छात्र की मौत के बाद केंद्र सरकार सख्त हो गई है।

यूजीसी ने जारी किया नोटिस

यूजीसी,  एआईसीटीई के माध्यम से देशभर के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, मेडिकल कॉलेज समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को नोटिस जारी करते हुए नए सत्र से पहले रैगिंग से निपटने की तैयारी करने का निर्देश दिया है।

पहली बार राज्य सरकारों को भी जवाबदेह बनाया गया है। ताकि राज्य संबंधित पुलिस थाने के माध्यम से कैंपस में जाकर रैगिंग की तैयारियों आदि का जायजा ले सकें।
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ऐश्वर्या राय करेगी लोगों को जागरुक

अभी तक नोटिस आदि के माध्यम से विश्वविद्यालयों को रैगिंग से निपटने व तैयारी के दिशानिर्देश जारी किए जाते थे। पहली बार छह वीडियो भी तैयार किए गए हैं। पांच से बीस मिनट की अवधि के इन वीडियो में रैगिंग के प्रकार, रैगिंग की जरूरत, रैगिंग पर कानूनी कार्रवाई समेत छात्रों के अधिकारियों के बारे में भी बताया गया है। बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या सकुजा रैगिंग को लेकर जागरूकता लाती नजर आएंगी।

जबकि पुलिस अधिकारी से लेकर कानूनी विशेषज्ञ कानून के तहत जानकारी देंगे। यह सभी वीडियो यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध होंगे। इसके अलावा इन वीडियो को विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान को अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड करना होगा या लिंक देना होगा। ताकि आम छात्रों को रैगिंग की जानकारी मिल सके।
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